आज का पंचांग : अनुशासन में जियें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

गाय हमारे ग्रामीण और शहरी जीवन की एक बहुत ही सशक्त कड़ी है। अगर आज थोड़ा बहुत भी ग्रामीण क्षेत्र में जीवन बचा है तो उसके पीछे गाय है। यदि हम गाय की सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए संकल्पित होते हैं तो इसका फायदा शहरी जीवन को मिलेगा।

जो लोग नगरों में रह रहे हैं, वही जानते हैं कि जीवन कितना चुनौतीपूर्ण हो चुका है? रसोई बजट बिगड़ गया, नौकरी-कारोबार में दबाव है, अचल संपत्ति की उलझनें हैं, किफायती आवास का धोखा है । फिर भी लोगों को लगता है कि मौज-मस्ती का सबसे बड़ा अड्डा शहर ही हैं। गो-माता को बचाइए तो शायद शहरी जीवन में भी थोड़ी राहत मिलेगी।

आज का भगवद् चिंतन
अनुशासन में जियें

जीवन को अनुशासन में जिया जाना चाहिए क्योंकि अनुशासनहीनता जीवन को पथभ्रष्ट कर देती है। पानी अनुशासनहीन होता है तो बाढ़ का रूप धारण कर लेता है। हवा अनुशासनहीन होती है तो आँधी बन जाती है और अग्नि यदि अनुशासनहीन हो जाती है तो महा विनाश का कारण बन जाती है। अनुशासनहीनता स्वयं के जीवन को तो विनाश की तरफ ले ही जाती है साथ ही साथ दूसरों के लिए भी विनाश का कारण बन जाती है।

अनुशासन में बहकर ही एक नदी सागर तक पहुँचकर सागर ही बन जाती है। अनुशासन में बँधकर ही एक बेल जमीन से ऊपर उठकर वृक्ष जैसी ऊँचाई को प्राप्त कर पाती है और अनुशासन में रहकर ही वायु फूलों की सुगंध को अपने में समेटकर स्वयं सुगंधित होकर चारों दिशाओं को सुगंध से भर देती है। गाड़ी अनुशासन में चले तो यात्रा का आनंद और बढ़ जाता है। इसी प्रकार जीवन भी अनुशासन में चले तो जीवन यात्रा का आनंद भी और अधिक बढ़ जाता है।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:08 ए एमसूर्यास्त06:57 पी एम
चन्द्रोदय05:08 ए एम, अप्रैल 16चन्द्रास्त04:46 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथित्रयोदशी – 10:31 पी एम तकनक्षत्रपूर्व भाद्रपद – 03:22 पी एम तक
चतुर्दशीउत्तर भाद्रपद
योगब्रह्म – 01:25 पी एम तककरणगर – 11:27 ए एम तक
इन्द्रवणिज – 10:31 पी एम तक
वारबुधवारविष्टि
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते2चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिकुम्भ – 09:37 ए एम तकनक्षत्र पदपूर्व भाद्रपद – 09:37 ए एम तक
मीनपूर्व भाद्रपद – 03:22 पी एम तक
सूर्य राशिमेषउत्तर भाद्रपद – 09:05 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रअश्विनीउत्तर भाद्रपद – 02:45 ए एम, अप्रैल 16 तक
सूर्य नक्षत्र पदअश्विनीउत्तर भाद्रपद
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 49 मिनट्स 09 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 09 मिनट्स 49 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:32 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:38 ए एम से 05:23 ए एमप्रातः सन्ध्या05:01 ए एम से 06:08 ए एम
अभिजित मुहूर्तकोई नहींविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:32 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:56 पी एम से 07:18 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:57 पी एम से 08:04 पी एम
अमृत काल07:37 ए एम से 09:10 ए एमनिशिता मुहूर्त12:10 ए एम, अप्रैल 16 से 12:54 ए एम, अप्रैल 16

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