भाई कमलानंद ने गौ-आधारित अर्थव्यवस्था, समग्र स्वास्थ्य, गांवों की ओर लौटने की प्रेरणा के दिए मूल मंत्र

नई दिल्ली : आज एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रख्यात समाजशास्त्री एवं गांधीवादी विचारक डॉ. कमल टावरी के नेतृत्व में “समग्रवादी विकास” और “हिंद स्वराज्य” की परिकल्पना पर गहन विचार-विमर्श किया गया।


अपने जीवन के व्यापक अनुभव—सेना में सेवा, आईएएस अधिकारी के रूप में कार्य, खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ाव तथा सामाजिक-आर्थिक विषयों पर लेखन—के आधार पर भाई कमलानंद ( डॉ. कमल टावरी) ने एक ऐसे भारत की कल्पना प्रस्तुत की, जो आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और प्रकृति के साथ संतुलित हो। उन्होंने “समखेती”, गौ-आधारित अर्थव्यवस्था, समग्र स्वास्थ्य, गांवों की ओर लौटने की प्रेरणा, “निराशा छोड़ो—जड़ से जुड़ो” जैसे मूल मंत्रों पर विशेष बल दिया। साथ ही “शुभ-लाभी बनो” के विचार के माध्यम से नैतिक और सतत विकास की दिशा को रेखांकित किया।


गोष्ठी में यह भी चर्चा हुई कि क्या पत्रकारिता के माध्यम से पर्यावरणीय परिवर्तन को गति दी जा सकती है, और किस प्रकार मीडिया समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बन सकता है।


इस अवसर पर विचारक संजय शर्मा, सेवानिवृत्त कर्नल एवं पर्यावरणविद रविंद्र गुप्ता , पत्रकार एवं राइटर नलिमा ठाकुर तथा पत्रकार एवं एक्टर हमवीर सिंह सहित कई प्रबुद्धजनों ने अपने विचार व्यक्त किए।
गोष्ठी का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रहकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा, जिससे भारत को पुनः “विश्वगुरु” बनाने की दिशा में समग्र प्रयास किए जा सकें।

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