पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
गाय हमारे ग्रामीण और शहरी जीवन की एक बहुत ही सशक्त कड़ी है। अगर आज थोड़ा बहुत भी ग्रामीण क्षेत्र में जीवन बचा है तो उसके पीछे गाय है। यदि हम गाय की सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए संकल्पित होते हैं तो इसका फायदा शहरी जीवन को मिलेगा।
जो लोग नगरों में रह रहे हैं, वही जानते हैं कि जीवन कितना चुनौतीपूर्ण हो चुका है? रसोई बजट बिगड़ गया, स्वास्थ्य में बेचैनी है, नौकरी-कारोबार में दबाव है, अचल संपत्ति की उलझनें हैं, किफायती आवास का धोखा है और अपराध कब आपके जीवन में प्रकट हो जाए, कह नहीं सकते। फिर भी लोगों को लगता है कि मौज-मस्ती का सबसे बड़ा अड्डा शहर ही हैं। गो-माता को बचाइए तो शायद शहरी जीवन में भी थोड़ी राहत मिलेगी।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:07 ए एम | सूर्यास्त | 06:57 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 05:42 ए एम, अप्रैल 17 | चन्द्रास्त | 05:50 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | चतुर्दशी – 08:11 पी एम तक | नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद – 01:59 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| अमावस्या | रेवती | ||
| योग | इन्द्र – 10:38 ए एम तक | करण | विष्टि – 09:25 ए एम तक |
| वैधृति | शकुनि – 08:11 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | चतुष्पाद | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 3 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मीन | नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद – 08:23 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मेष | उत्तर भाद्रपद – 01:59 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | अश्विनी | रेवती – 07:32 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | अश्विनी | रेवती – 01:04 ए एम, अप्रैल 17 तक | |
| रेवती |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 50 मिनट्स 43 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 08 मिनट्स 16 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:32 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:37 ए एम से 05:22 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:00 ए एम से 06:07 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:06 पी एम से 12:58 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:32 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:56 पी एम से 07:19 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:57 पी एम से 08:04 पी एम |
| अमृत काल | 09:27 ए एम से 10:58 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:09 ए एम, अप्रैल 17 से 12:54 ए एम, अप्रैल 17 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 01:59 पी एम से 06:06 ए एम, अप्रैल 17 |
आज का भगवद् चिंतन
विश्वासपूर्ण जीवन
विश्वास के साथ उद्यम से ही मनोरथों की सिद्धि होती है। स्वयं के पैरों पर विश्वास ही हमें किसी दौड़ में विजेता बनाती है। प्रभु कृपा के बल के साथ ही जीवन के किसी भी क्षेत्र में विजय के लिए स्वयं पर विश्वास होना आवश्यक है। जीवन में सफल होने का एक सीधा सा मंत्र है, कि आपकी उम्मीद स्वयं से होनी चाहिए किसी और से नहीं। सूर्य स्वयं के प्रकाश से चमकता है और चन्द्रमा को चमकने के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर रहना होता है।
दूसरे के प्रकाश से प्रकाशित होने की उम्मीद रखने के कारण ही चन्द्रमा की चमक कभी ज्यादा, कभी कम तो कभी पूरी तरह क्षीण भी हो जाती है। कमल उतनी ही देर अपना सौंदर्य बिखेरता है जितनी देर उसे सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है। दूसरों से किसी भी प्रकार की उम्मीद छोड़कर प्रभु कृपा के बल का भरोसा बनाए रखकर स्वयं ही उद्यम में लगना होगा ताकि संपूर्ण जीवन प्रसन्नता से जिया जा सके। उड़ान वही पक्षी भर सकता है, जिसे स्वयं के पंखों पर विश्वास होता है।