पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज (14 अप्रैल) मेष संक्रांति है। सूर्य ने मेष राशि में प्रवेश कर लिया है। अब यह ग्रह 15 मई तक इसी राशि में रहेगा। धर्म और ज्योतिष के नजरिए से सूर्य के राशि परिवर्तन का महत्व काफी ज्यादा माना जाता है। सूर्य जब अपनी राशि बदलता है तो इस घटना को संक्रमण यानी संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति का नाम उस राशि के आधार पर तय होता है, जिसमें सूर्य प्रवेश करता है।
मीन राशि से निकलकर सूर्य मेष राशि में आ गया है, इसके साथ ही खरमास खत्म हो गया है। अब विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त मिलने लगेंगे।
मेष संक्रांति से जुड़ी परंपराएं
मेष संक्रांति के अवसर पर नदी में स्नान, पूजा, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना, दान-पुण्य करने की परंपरा प्रचलित है। अभी गर्मी का समय है, इसलिए आज पानी, मटका, छाता, जूते-चप्पल का दान जरूर करें। किसी मंदिर या सार्वजनिक जगह पर छायादार पेड़ का पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करने का संकल्प लें। मेष संक्रांति का जिक्र सूर्य सिद्धांत, भविष्य पुराण और विष्णु धर्मोत्तर पुराण जैसे ग्रंथों में भी है।
मेष संक्रांति पर करें ये शुभ काम
इस दिन विशेष रूप से गंगा, यमुना, गोदावरी, शिप्रा, नर्मदा और कावेरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा प्रचलित है। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:09 ए एम | सूर्यास्त | 06:56 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 04:35 ए एम, अप्रैल 15 | चन्द्रास्त | 03:45 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वादशी – 12:12 ए एम, अप्रैल 15 तक | नक्षत्र | शतभिषा – 04:06 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| त्रयोदशी | पूर्व भाद्रपद | ||
| योग | शुक्ल – 03:40 पी एम तक | करण | कौलव – 12:46 पी एम तक |
| ब्रह्म | तैतिल – 12:12 ए एम, अप्रैल 15 तक | ||
| वार | मंगलवार | गर | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 31 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कुम्भ | नक्षत्र पद | शतभिषा – 10:09 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मीन – 09:39 ए एम तक | शतभिषा – 04:06 पी एम तक | |
| मेष | पूर्व भाद्रपद – 09:59 पी एम तक | ||
| सूर्य नक्षत्र | रेवती – 09:39 ए एम तक | पूर्व भाद्रपद – 03:50 ए एम, अप्रैल 15 तक | |
| अश्विनी | पूर्व भाद्रपद | ||
| सूर्य नक्षत्र पद | रेवती – 09:39 ए एम तक | ||
| अश्विनी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 47 मिनट्स 35 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 11 मिनट्स 22 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:33 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:39 ए एम से 05:24 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:02 ए एम से 06:09 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:07 पी एम से 12:58 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:32 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:55 पी एम से 07:18 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:56 पी एम से 08:04 पी एम |
| अमृत काल | 08:53 ए एम से 10:29 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:10 ए एम, अप्रैल 15 से 12:54 ए एम, अप्रैल 15 |
| त्रिपुष्कर योग | 04:06 पी एम से 12:12 ए एम, अप्रैल 15 |