पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
ईश्वर किसी को बीच में से ना उठाए तो हर इंसान को तीन उम्र से गुजरना ही पड़ेगा- बचपन, जवानी और बुढ़ापा। हमारे जीवन में एक उम्र होती है- अधेड़ उम्र । आंकड़ों के अनुसार इसे 40 से 60 के बीच माना जाता है। यही वो उम्र है, जो हमें बुढ़ापे में ले जाती है।
अब इसके बीच 50 से 70 की उम्र पकड़ी जाए। जैसे उसे मिडिल एज कहते हैं, ऐसे हम इसे हाफ एज मान लें। मिडिल और हाफ में फर्क है, मध्य और आधे का। हम अपनी अधेड़ उम्र को ऐसा मानें कि आधी बीत चुकी है, आधी बची है। तो जो अब तक नहीं कर पाए, वो इस दौर में कर लीजिए।
जैसे मूर्तिकार पत्थर से मूर्ति बनाते समय छैनी-हथौड़ी से व्यर्थ का पत्थर हटाता है तो आंख, होठ, नाक-सब बाहर निकल आते हैं। हमें भी अब जीवन को ऐसे तराशने का अभ्यास करना चाहिए। खासतौर पर इस उम्र में यह महसूस करें कि जो आधी बची है, उसको तराशें। और इसके लिए तीन बातों पर रोज काम करें- शरीर, मन और आत्मा। वृद्धावस्था में प्रवेश के पहले यदि होमवर्क ठीक हो गया और आत्मा की अनुभूति होने लगी तो यह पिछली सभी उम्रों से शानदार होगी।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:00 ए एम | सूर्यास्त | 07:01 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 11:12 ए एम | चन्द्रास्त | 01:24 ए एम, अप्रैल 24 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | सप्तमी – 08:49 पी एम तक | नक्षत्र | पुनर्वसु – 08:57 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| अष्टमी | पुष्य | ||
| योग | सुकर्मा – 06:08 ए एम तक | करण | गर – 09:45 ए एम तक |
| धृति – 03:32 ए एम, अप्रैल 24 तक | वणिज – 08:49 पी एम तक | ||
| शूल | विष्टि | ||
| वार | गुरुवार | ||
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 10 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मिथुन – 03:13 पी एम तक | नक्षत्र पद | पुनर्वसु – 09:31 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| कर्क | पुनर्वसु – 03:13 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | पुनर्वसु – 08:57 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | अश्विनी | पुष्य – 02:43 ए एम, अप्रैल 24 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | अश्विनी | पुष्य |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 01 मिनट 24 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 57 मिनट्स 39 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:31 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:32 ए एम से 05:16 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:54 ए एम से 06:00 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:05 पी एम से 12:57 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:33 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:00 पी एम से 07:22 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:01 पी एम से 08:07 पी एम |
| अमृत काल | 06:41 पी एम से 08:11 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, अप्रैल 24 से 12:52 ए एम, अप्रैल 24 |
| गुरु पुष्य योग | 08:57 पी एम से 05:59 ए एम, अप्रैल 24 | सर्वार्थ सिद्धि योग | पूरे दिन |
| अमृत सिद्धि योग | 08:57 पी एम से 05:59 ए एम, अप्रैल 24 |