पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
धर्मिक मान्यता के अनुसार, आज ही के दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार ‘भगवान नरसिंह’ के प्राकट्य हुए थे और वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मां छिन्नमस्ता प्रकटोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
आज का भगवद् चिंतन
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमः
भगवान नृसिंह का रूप बड़ा अद्भुत और निराला है। उसमें जितना क्रोध भरा है उतना ही वात्सल्य भी। भगवान का स्वरूप जहाँ एक तरफ “शांताकारम्” अर्थात् परम शांत है तो दूसरी तरफ अति उग्र भी है। अंतर केवल इतना है, कि विधर्मियों के लिए प्रभु जितने कठोर हैं, धर्मावलंबियों अथवा अपने भक्तों के लिए उतने ही शांत अथवा वात्सल्य रूप भी।
जो जीव धर्म मार्ग का अवलंबन लेता है अथवा उस प्रभु का पावन नामाश्रय लेता है फिर प्रभु द्वारा प्रत्येक स्थिति में उसे अभय प्रदान किया जाता है। बाली के पुत्र अंगद को, रावण के भाई विभीषण को और हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रह्लाद को उन कृपा सिंधु प्रभु के द्वारा बड़े स्नेह और आत्मीयता के साथ अपनी शरण प्रदान की जाती है क्योंकि भगवान किसी का कुल, गोत्र एवं परिवार नहीं अपितु केवल उसके हृदय की निर्मल भावना देखते हैं।
जब सारे दरवाजे बंद हो गए हों, उम्मीद की कोई किरण बाकी न रह गई हो और विपत्तियों के चक्रव्यूह ने आपको चारों ओर से घेर लिया हो, उन क्षणों में भी आपका विश्वास उस प्रभु के ऊपर बना रहना चाहिए, तब भले ही नारायण को नृसिंह रूप ही क्यों न धारण करना पड़े और खंबे को ही माँ का गर्भ क्यों न बनाना पड़े, लेकिन अपने भक्तों की रक्षा के लिए वो प्रभु आते अवश्य हैं।
श्री नृसिंह चतुर्दशी के पावन पर्व की आप सभी को अनंत मंगल बधाई।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:54 ए एम | सूर्यास्त | 07:05 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 06:06 पी एम | चन्द्रास्त | 05:12 ए एम, मई 01 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | चतुर्दशी – 09:12 पी एम तक | नक्षत्र | चित्रा – 02:16 ए एम, मई 01 तक |
|---|---|---|---|
| पूर्णिमा | स्वाती | ||
| योग | वज्र – 08:55 पी एम तक | करण | गर – 08:29 ए एम तक |
| सिद्धि | वणिज – 09:12 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | विष्टि | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 17 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कन्या – 01:14 पी एम तक | नक्षत्र पद | चित्रा – 06:44 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| तुला | चित्रा – 01:14 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | चित्रा – 07:45 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | भरणी | चित्रा – 02:16 ए एम, मई 01 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | भरणी | स्वाती |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 11 मिनट्स 35 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 47 मिनट्स 35 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:30 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:27 ए एम से 05:10 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:49 ए एम से 05:54 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:03 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:34 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:04 पी एम से 07:26 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:05 पी एम से 08:10 पी एम |
| अमृत काल | 07:20 पी एम से 09:04 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, मई 01 से 12:51 ए एम, मई 01 |
| रवि योग | 05:54 ए एम से 02:16 ए एम, मई 01 |