आज का पंचांग : सत्य चर्चा नहीं, चर्या बने

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है. आज (16 मई) शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या हैं। आज शनि देव की विशेष पूजा की जाएगी। खासतौर पर शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा है। इस परंपरा के पीछे हनुमान जी से जुड़ी कई मान्यता है।

आज का भगवद् चिन्तन
सत्य चर्चा नहीं, चर्या बने

सत्य केवल चर्चा का विषय नहीं, हमारी चर्या का विषय भी बनना चाहिए। श्रेष्ठ विचारों को वाणी का आभूषण मात्र बनाने से कल्याण नहीं होगा। श्रेष्ठ विचार आचरण के रूप में घटित हों तब ही हमारा कल्याण निश्चित है। जीवन में सत्य को सुनना ही पर्याप्त नहीं होता अपितु सत्य को चुनना भी आवश्यक है। सत्य की चर्चा करना एक बात है पर सत्य का चर्या बन जाना दूसरी बात है। मिश्री-मिश्री करने मात्र से मुँह में मिठास नहीं घुल जाती है, मिश्री को चख कर ही मुँह मीठा हो पाता है।

कंठ में शीतल जल उतर जाने पर ही हमारी प्यास बुझ सकती है। इसी प्रकार जीवन की श्रेष्ठता के लिए उच्च विचारों का जिह्वा के साथ-साथ जीवन में उतरना भी परमावश्यक हो जाता है। दुनिया का सबसे प्रभावी उपदेश वही होता है, जो जीभ से नहीं जीवन से दिया जाता है। आचरण में सत्यता और श्रेष्ठता का उतर जाना ही किसी के व्यक्तित्व को पूजनीय बनाता है। श्रेष्ठ विचार चर्चा के साथ-साथ हमारी चर्या का अंग भी अवश्य बनने चाहिए।

पञ्चाङ्ग
तिथिअमावस्या – 01:30 ए एम, मई 17 तकनक्षत्रभरणी – 05:30 पी एम तक
प्रतिपदाकृत्तिका
योगसौभाग्य – 10:26 ए एम तककरणचतुष्पाद – 03:22 पी एम तक
शोभननाग – 01:30 ए एम, मई 17 तक
वारशनिवारकिंस्तुघ्न
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते2वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमेष – 10:46 पी एम तकनक्षत्र पदभरणी – 06:55 ए एम तक
वृषभभरणी – 12:13 पी एम तक
सूर्य राशिवृषभभरणी – 05:30 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रकृत्तिकाकृत्तिका – 10:46 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदकृत्तिकाकृत्तिका – 04:02 ए एम, मई 17 तक
  कृत्तिका
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 32 मिनट्स 01 सेकण्ड
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान10 घण्टे 27 मिनट्स 27 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:19 ए एम से 05:01 ए एमप्रातः सन्ध्या04:40 ए एम से 05:43 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:02 पी एम से 12:56 पी एमविजय मुहूर्त02:44 पी एम से 03:38 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:13 पी एम से 07:34 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:15 पी एम से 08:17 पी एम
अमृत काल01:15 पी एम से 02:40 पी एमनिशिता मुहूर्त12:07 ए एम, मई 17 से 12:49 ए एम, मई 17