आज का पंचांग : परिवार एक मंदिर

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का चिंतन

संसार हमें भागना सिखाएगा, हमें ठहरना सीख लेना होगा, वही काम आएगा। जन्म जन्म से हम भाग तो रहे हैं, इस बार ठहर कर भी देखना है। जिंदगी जीना और जिंदा रहने में काफ़ी फर्क है, जिंदा रहना एक “जरूरत” है और जिंदगी जीना एक “कला” है।

आज का भगवद् चिंतन
परिवार एक मंदिर

परिवार मनुष्य जीवन की सबसे प्रमुख और सबसे प्रथम इकाई होती है, जिसमें माता-पिता के रूप में स्वयं वो निराकार ब्रह्म, साकार रूप में विराजमान रहता है। मानव जीवन के संस्कारों की प्रथम पाठशाला का नाम ही परिवार है। संस्कारों से परवरिश और परवरिश से परिवार का परिचय मिल जाता है। एक आदर्श परिवार के बिना एक आदर्श जीवन का निर्माण कदापि संभव ही नहीं।

माता-पिता की सेवा ही समस्त देवी-देवताओं की सेवा मानी गई है। सच ही कहा गया है कि जिस घर में माँ-बाप हँसते हैं, उसी घर में भगवान बसते हैं। एक लकड़ी अकेले आसानी से टूट जाती है और उन्हीं लकड़ी को जब बंडल बनाकर तोड़ने लगते हैं तो बहुत मुश्किल और कठिन हो जाता है।

इसी प्रकार जब हम अकेले पड़ जाते हैं तो कोई भी आसानी से हमें तोड़ सकता है, लेकिन एक होते ही तोड़ने वाला स्वयं टूट जाता है। परस्पर प्रेम, सम्मान, समर्पण और सहयोग की भावना के साथ-साथ कर्त्तव्यनिष्ठा से ही मकान घर और घर परिवार बनता है। आज की इस सदी में हम इकट्ठे होकर न रह सकें कोई बात नहीं लेकिन कम से कम एक होकर अवश्य रह सकते हैं। परिवार के साथ रहें, संस्कार के साथ रहें।

पञ्चाङ्ग
तिथिप्रतिपदा – 09:40 पी एम तकनक्षत्रकृत्तिका – 02:32 पी एम तक
द्वितीयारोहिणी
योगशोभन – 06:15 ए एम तककरणकिंस्तुघ्न – 11:36 ए एम तक
अतिगण्ड – 02:00 ए एम, मई 18 तकबव – 09:40 पी एम तक
सुकर्माबालव
वाररविवार  
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते3ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *