पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
संघर्ष से सफलता
बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष भी बड़ा ही होगा और संघर्ष बड़ा होगा तो निश्चित ही जीत भी आपकी ही होगी। अंधेरे से लड़ने से कालिमा दूर नहीं होगी उसके लिए तो बस एक दीपक जलाना पड़ेगा। कुछ भी अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता ही नहीं है, बस दीपक का जलना ही अंधेरे का भागना है। ऐसे ही कुछ भी अतिरिक्त नहीं बस निरंतर सामर्थ्य के साथ उचित दिशा में संघर्ष ही सफलता की एक मात्र माँग है।
संघर्ष से डरना सफलता से दूर होते चले जाना है। मोबाइल हाथ में रहने पर भी सही पासवर्ड के बिना वो खुलने वाला नहीं है। ऐसे ही लक्ष्य निकट होते हुए भी संघर्ष के बिना वो मिलने वाला नहीं है। संघर्ष ही वो पासवर्ड है, जिससे सफलता के द्वार खुल पाते हैं और लक्ष्य की प्राप्ति संभव हो पाती है। जिनके हाथों में संघर्ष का पासवर्ड है, उनके कदम सफलता के शिखर तक अवश्य पहुँच जाते हैं।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:44 ए एम | सूर्यास्त | 07:14 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 04:12 ए एम, मई 15 | चन्द्रास्त | 04:34 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वादशी – 11:20 ए एम तक | नक्षत्र | रेवती – 10:34 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| त्रयोदशी | अश्विनी | ||
| योग | प्रीति – 05:53 पी एम तक | करण | तैतिल – 11:20 ए एम तक |
| आयुष्मान् | गर – 10:00 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | वणिज | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 रौद्र | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 31 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मीन – 10:34 पी एम तक | नक्षत्र पद | रेवती – 05:55 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| मेष | रेवती – 11:30 ए एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | रेवती – 05:03 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | कृत्तिका | रेवती – 10:34 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | कृत्तिका | अश्विनी – 04:02 ए एम, मई 15 तक | |
| अश्विनी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 29 मिनट्स 43 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 29 मिनट्स 41 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:20 ए एम से 05:02 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:41 ए एम से 05:44 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:44 पी एम से 03:38 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:12 पी एम से 07:33 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:14 पी एम से 08:16 पी एम |
| अमृत काल | 08:20 पी एम से 09:49 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:07 ए एम, मई 15 से 12:49 ए एम, मई 15 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | पूरे दिन |