पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
झूठ बोलना एक विकल्प है, जिसे हम चुनते हैं। क्योंकि जिसे झूठ बोलना आता है, वो सच तो बोल ही सकता है। लेकिन जब भी हमारे पास चयन का अवसर आता है, हम सच को कठिन और झूठ को आसान मान लेते हैं। पहले कहा जाता था कि गांव के लोग सच्चे हैं और शहर में गली-गली, डगर-डगर झूठ बसता है।
लेकिन अब बेईमानी, निकम्मापन, झूठ- सब जगह पसर गया, क्या शहर, क्या गांव? वर्तमान युद्ध ने शहरी जीवन को हिला के रख दिया है। बचत में गिरावट आ गई, जिसके परिणाम भविष्य में दिखेंगे। ये तो तय है कि मनुष्य के शहरी जीवन में पिछले 20 सालों में हमने जो परिवर्तन और प्रगति की है, वो पिछले 2 हजार साल में नहीं हुई।
डिजिटल मीडिया ने एक नियम पकड़ लिया कि लोगों को इतना प्रभावित कर दिया जाए कि वो उसकी बात मानें। प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और अपराध शहर के विकास का हिस्सा बन गए। ऐसे में सिर्फ आध्यात्मिक गलियारे हैं, जहां मनुष्य को ऐसे विपरीत वातावरण में रहते हुए भी शांति मिल सकती है।
श्री सालासर बालाजी मंदिर
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:40 ए एम | सूर्यास्त | 07:18 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 10:07 ए एम | चन्द्रास्त | 12:03 ए एम, मई 22 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | पञ्चमी – 08:26 ए एम तक | नक्षत्र | पुष्य – 02:49 ए एम, मई 22 तक |
|---|---|---|---|
| षष्ठी | अश्लेशा | ||
| योग | गण्ड – 10:58 ए एम तक | करण | बालव – 08:26 ए एम तक |
| वृद्धि | कौलव – 07:20 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | तैतिल | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 7 | ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कर्क | नक्षत्र पद | पुष्य – 09:47 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | वृषभ | पुष्य – 03:25 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | कृत्तिका | पुष्य – 09:06 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | कृत्तिका – 04:31 ए एम, मई 22 तक | पुष्य – 02:49 ए एम, मई 22 तक | |
| कृत्तिका | अश्लेशा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 37 मिनट्स 20 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 22 मिनट्स 14 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:17 ए एम से 04:59 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:38 ए एम से 05:40 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:45 पी एम से 03:40 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:16 पी एम से 07:37 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:18 पी एम से 08:20 पी एम |
| अमृत काल | 08:47 पी एम से 10:18 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, मई 22 से 12:49 ए एम, मई 22 |
| गुरु पुष्य योग | 05:40 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22 | सर्वार्थ सिद्धि योग | 05:40 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22 |
| अमृत सिद्धि योग | 05:40 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22 | रवि योग | 05:40 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22 |