आज का पंचांग : सँभलना सीखें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का भगवद् चिंतन
सँभलना सीखें

जीवन में ठोकर लगने का अर्थ ये नहीं कि चलना ही छोड़ दिया जाये अपितु ये है, कि अब आगे सँभल कर चला जाये और यदि मार्ग ही गलत है तो उसका त्याग किया जाये। जो व्यक्ति एक बार ठोकर खाकर सँभल जाता है, वो बड़ी ठोकर खाने से भी बच जाता है, लेकिन जो व्यक्ति बार-बार ठोकर खाकर भी उसी मार्ग पर चलता रहता है, वह अपने पतन की आधारशिला स्वयं अपने हाथों से रखता है।

यदि हमें ठोकर लगकर भी सँभलना नहीं आता तो इसका अर्थ है, कि हमें जीवन पथ पर चलना भी नहीं आता। ठोकरों से सीख लेकर चलने वाला व्यक्ति एक दिन सकुशल अपने गंतव्य तक पहुँच ही जाता है। ठोकरों की डर से चलना ही छोड़ दिया जाये यह तो कदापि संभव नहीं लेकिन ठोकरों से सँभलने और सावधानी से सुपथ पर चलने की सीख अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।

आज का विचार

एक ये पीढ़ी है, जो”इकट्ठा करने” के लिये जी रही है, एक वो पीढ़ी थी, जो”इकट्ठा रहने” के लिये जीती थी। Life Can Only be Understood Backwards; But it Must be Lived फॉरवर्ड्स.

पञ्चाङ्ग
तिथिचतुर्थी – 11:06 ए एम तकनक्षत्रआर्द्रा – 06:12 ए एम तक
पञ्चमीपुनर्वसु – 04:12 ए एम, मई 21 तक
योगशूल – 02:10 पी एम तकपुष्य
गण्डकरणविष्टि – 11:06 ए एम तक
वारबुधवारबव – 09:42 पी एम तक
पक्षशुक्ल पक्षबालव
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते6ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमिथुन – 10:38 पी एम तकनक्षत्र पदआर्द्रा – 06:12 ए एम तक
कर्कपुनर्वसु – 11:38 ए एम तक
सूर्य राशिवृषभपुनर्वसु – 05:07 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रकृत्तिकापुनर्वसु – 10:38 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदकृत्तिकापुनर्वसु – 04:12 ए एम, मई 21 तक
  पुष्य
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 36 मिनट्स 19 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 23 मिनट्स 13 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  

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