आज का पंचांग : जीवन की अनिश्चितता

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का विचार

जब आप जागृत अवस्था में होते है, तो ही सर्वश्रेष्ठ स्वप्नों का सृजन होता है। और आपकी मनोवृति ही आपकी महानता को निर्धारित करती है.!!

आज का भगवद् चिंतन
जीवन की अनिश्चितता

बुरे समय को याद करके दुःखी होने की अपेक्षा अच्छे समय को याद करके खुश होना कई गुना अच्छा है। जीवन की पटरी रेल की तरह समानांतर नहीं चलती है अपितु सड़क की तरह कहीं ऊपर, कहीं नीचे, कहीं चौड़ी, कहीं संकीर्ण, कहीं समतल तो कहीं ऊबड़खाबड़ होती है। यहाँ कभी कुछ अच्छा तो कभी कुछ बुरा सबके जीवन में घटित होता है। समय गलत होता है, लेकिन समझ गलत नहीं होनी चाहिए।

जीवन के जिस पहलू पर भी आपकी दृष्टि रहेगी उसी आकार में जीवन अपने आप को ढालने लगेगा। आप अपनी खुशियों पर दृष्टि रखेंगे तो वो आपको दुःखों की विस्मृति कराकर आपके मन को प्रसन्नता से भर देगा और यदि आपकी दृष्टि बुरे समय पर रही तो वो अभाव और अतृप्ति का आभास कराकर आपके मन को दुःखी कर देगा। दुःख होते हुए भी मन से अपने अच्छे समय को याद करके खुश रहना ही जीवन की प्रसन्नता का रहस्य है।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:41 ए एमसूर्यास्त07:16 पी एम
चन्द्रोदय07:47 ए एमचन्द्रास्त10:22 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथितृतीया – 02:18 पी एम तकनक्षत्रमृगशिरा – 08:41 ए एम तक
चतुर्थीआर्द्रा
योगधृति – 05:49 पी एम तककरणगर – 02:18 पी एम तक
शूलवणिज – 12:39 ए एम, मई 20 तक
वारमंगलवारविष्टि
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते5ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमिथुननक्षत्र पदमृगशिरा – 08:41 ए एम तक
सूर्य राशिवृषभआर्द्रा – 02:02 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रकृत्तिकाआर्द्रा – 07:23 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदकृत्तिकाआर्द्रा – 12:46 ए एम, मई 20 तक
  आर्द्रा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 35 मिनट्स 16 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 24 मिनट्स 14 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:18 ए एम से 04:59 ए एमप्रातः सन्ध्या04:39 ए एम से 05:41 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:02 पी एम से 12:56 पी एमविजय मुहूर्त02:45 पी एम से 03:39 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:15 पी एम से 07:36 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:16 पी एम से 08:19 पी एम
अमृत काल09:14 पी एम से 10:40 पी एमनिशिता मुहूर्त12:08 ए एम, मई 20 से 12:49 ए एम, मई 20
रवि योग08:41 ए एम से 05:41 ए एम, मई 20

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *