आज का पंचांग : जीवन में परिवर्तन

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज का विचार

दुनिया में जरुरी नहीं कि हर कोई हमें समझ पाए, जैसे तराजू भी सोने को तोलते वक्त उसका सिर्फ वजन बता सकता है उसकी शुद्धता (Quality) नहीं बता सकता.!!

आज का भगवद् चिन्तन
जीवन में परिवर्तन

मनुष्य जब चाहे तब अपने को श्रेष्ठ पथ का पथिक बना सकता है। किसी भी मनुष्य के लिए अंतिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन के संभावनाओं के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह चाहे तो सदैव अपने जीवन को उत्कृष्ट से उत्कृष्ट बनाने में अथवा निकृष्ट से निकृष्ट बना पाने में समर्थ होता है। मनुष्य जीवन के अलावा अन्य सभी प्राणी प्रकृति के ही अधीन होते हैं। उनमें जन्म के बाद अपने जीवन परिवर्तन की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है।

मनुष्य अपने संग से, अपने संस्कारों से एवं अपने परिवेश से जीवन को परिवर्तित करने में सक्षम होता है। यदि कुसंग से अपना पतन भी करा सकता है तो सुसंग से जीवन उन्नति एवं कल्याण के मार्ग पर भी बढ़ सकता है। उस प्रभु ने कृपा करके हमको मानव देह प्रदान किया है तो फिर श्रेष्ठ पथ का अनुगमन करते हुए, श्रेष्ठ का ही चिंतन करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना ही जीवन की परम सार्थकता है।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:39 ए एमसूर्यास्त07:19 पी एम
चन्द्रोदय12:16 पी एमचन्द्रास्त01:15 ए एम, मई 24
पञ्चाङ्ग
तिथिअष्टमी – 04:27 ए एम, मई 24 तकनक्षत्रमघा – 02:09 ए एम, मई 24 तक
नवमीपूर्वाफाल्गुनी
योगध्रुव – 06:14 ए एम तककरणविष्टि – 04:40 पी एम तक
व्याघात – 04:43 ए एम, मई 24 तकबव – 04:27 ए एम, मई 24 तक
हर्षणबालव
वारशनिवार  
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते9ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिसिंहनक्षत्र पदमघा – 08:04 ए एम तक
सूर्य राशिवृषभमघा – 02:03 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रकृत्तिकामघा – 08:05 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदकृत्तिकामघा – 02:09 ए एम, मई 24 तक
  पूर्वाफाल्गुनी
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 39 मिनट्स 17 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 20 मिनट्स 19 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:17 ए एम से 04:58 ए एमप्रातः सन्ध्या04:37 ए एम से 05:39 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:02 पी एम से 12:56 पी एमविजय मुहूर्त02:46 पी एम से 03:40 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:17 पी एम से 07:38 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:19 पी एम से 08:21 पी एम
अमृत काल11:45 पी एम से 01:21 ए एम, मई 24निशिता मुहूर्त12:08 ए एम, मई 24 से 12:50 ए एम, मई 24
रवि योग02:09 ए एम, मई 24 से 05:39 ए एम, मई 24

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