पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
प्रभात चिंतन
मित्रं भुड्क्ते संविभज्याश्रितेभ्यो
मितं स्वपित्यमितं कर्म कृत्वा।
ददात्यमित्रेष्वपि याचितः
संस्तमात्मवन्तं प्रजहत्यनर्थाः॥
भावार्थ:- जो व्यक्ति अपने आश्रित लोगों को बाँटकर स्वयं थोड़े से भोजन से ही संतुष्ट हो जाता है, कड़े परिश्रम के बाद भी थोड़ा सोता है तथा माँगने पर शत्रुओं की भी सहायता करता है, ऐसे सज्जन का अनर्थ कभी भी नहीं होता।
आज का विचार
जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है, तब हंसी-खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए.!!
आज का भगवद् चिन्तन
जैसा संग-वैसा रंग
बुरा करने से तो बचना ही चाहिए लेकिन बुरा सुनने और बुरा देखने से भी अपने आपको अवश्य बचाना चाहिए। संगति हमारे विचारों का निर्धारण करती है और विचारों से ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। जीवन निर्माण में विचारों एवं संगति की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारे जीवन की बुराई से ही हमारा जीवन बुरा नहीं बन जाता अपितु दूसरों के जीवन की बुराई देख-देखकर भी हमारा चित्त मलीन एवं जीवन विकारयुक्त बन जाता है।
देर से सही पर परिवेश अथवा संग का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। चंदन वृक्ष की संगति से सामान्य वृक्षों में सुगंधी आने लग जाती है और दूध की संगति से पानी का मोल भी बढ़ जाता है। इसी प्रकार से जीवन में आपका परिवेश, आपका संग, आपका समाज आपके जीवन को मूल्यवान अथवा निर्मूल्य बना देता है। पवित्र जीवन के लिए पवित्र विचार एवं पवित्र विचारों के लिए पवित्र परिवेश व पवित्र संगति का होना भी अति आवश्यक है।

आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:40 ए एम | सूर्यास्त | 07:18 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 11:14 ए एम | चन्द्रास्त | 12:42 ए एम, मई 23 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | षष्ठी – 06:24 ए एम तक | नक्षत्र | अश्लेशा – 02:08 ए एम, मई 23 तक |
|---|---|---|---|
| सप्तमी – 05:04 ए एम, मई 23 तक | मघा | ||
| अष्टमी | करण | तैतिल – 06:24 ए एम तक | |
| योग | वृद्धि – 08:19 ए एम तक | गर – 05:38 पी एम तक | |
| ध्रुव | वणिज – 05:04 ए एम, मई 23 तक | ||
| वार | शुक्रवार | विष्टि | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 रौद्र | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 8 | ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कर्क – 02:08 ए एम, मई 23 तक | नक्षत्र पद | अश्लेशा – 08:35 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सिंह | अश्लेशा – 02:23 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | वृषभ | अश्लेशा – 08:14 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | कृत्तिका | अश्लेशा – 02:08 ए एम, मई 23 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | कृत्तिका | मघा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 38 मिनट्स 19 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 21 मिनट्स 16 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:17 ए एम से 04:58 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:38 ए एम से 05:40 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:45 पी एम से 03:40 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:17 पी एम से 07:38 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:18 पी एम से 08:20 पी एम |
| अमृत काल | 12:34 ए एम, मई 23 से 02:08 ए एम, मई 23 | निशिता मुहूर्त | 12:08 ए एम, मई 23 से 12:49 ए एम, मई 23 |