पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आज गुरुवार का दिन इस बार बेहद खास है क्योंकि आज पुरुषोत्तम मास का पहला प्रदोष व्रत पड़ रहा है. इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन प्रदोष पूजा का शुभ समय दो घंटे से भी ज्यादा रहेगा. साथ ही गुरुवार व्रत, भगवान विष्णु की पूजा और पद्मिनी एकादशी का पारण भी आज ही है.
आज का विचार
अनुभव और कर्म ये दो हमारे गुरु हैं, दोनों ही साथ चलते हैं। कर्म परिस्थिति से लड़ना सिखाता है और अनुभव लक्ष्य हासिल करना.!
आज का भगवद् चिन्तन
मन की निर्मलता
अंतःकरण को स्वच्छ किये बिना हम परमात्मा को नहीं रिझा सकते हैं। दिखावा दुनिया को रिझाता है, लेकिन परमात्मा को रिझाने के लिए मन की निर्मलता ही एक मात्र शर्त है। “निर्मल मन जन सो मोहि पावा” इसका एक सीधा सा अर्थ यह भी हुआ कि जहाँ मन की निर्मलता होती है वहाँ जीवन में देवत्व का उदय भी होने लगता है। मन की शुद्धता में ही बुद्धता का जन्म भी होता है अर्थात जो भीतर से शुद्ध बन गया वो बाहर से बुद्ध बन गया।
प्रदर्शन का बल टिकाऊ नहीं होता वह समय के साथ-साथ क्षीण होने लगता है। प्रदर्शन से दुनियाभर की पहचान तो मिल जाती है लेकिन भीतर की रिक्तता बनी रहती है। हमारा जीवन बाहर से जितने दिखावे का होता है, भीतर से उतना ही अशांत, खिन्न और रिक्त बना रहता है। जहाँ जीवन प्रदर्शन शून्य होता है वहीं से आत्मदर्शन का जन्म होता है। स्वयं के भीतर मुड़ जाना ही परमात्म तत्व से जुड़ जाना भी है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वादशी – 07:56 ए एम तक | नक्षत्र | चित्रा – 08:08 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| त्रयोदशी | स्वाती | ||
| योग | वरीयान् – 03:55 ए एम, मई 29 तक | करण | बालव – 07:56 ए एम तक |
| परिघ | कौलव – 08:51 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | तैतिल | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 रौद्र | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 14 | ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | तुला | नक्षत्र पद | चित्रा – 08:08 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | वृषभ | स्वाती – 02:44 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | रोहिणी | स्वाती – 09:21 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | रोहिणी – 03:05 ए एम, मई 29 तक | स्वाती – 03:59 ए एम, मई 29 तक | |
| रोहिणी | स्वाती |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 43 मिनट्स 42 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 16 मिनट्स 01 सेकण्ड |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:30 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:15 ए एम से 04:57 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:36 ए एम से 05:38 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:57 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:47 पी एम से 03:42 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:20 पी एम से 07:41 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:21 पी एम से 08:23 पी एम |
| अमृत काल | 12:55 ए एम, मई 29 से 02:41 ए एम, मई 29 | निशिता मुहूर्त | 12:09 ए एम, मई 29 से 12:50 ए एम, मई 29 |