आज का पंचांग : आत्मा तक जाने का गलियारा मानवता है

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

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आज का विचार

ज्ञान अतीत की व्याख्या करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माण करने के लिए होता है। वक्त की एक आदत बहुत अच्छी है, जैसा भी हो गुजर जाता है.

प्रभात चिंतन

स्वयं कर्म करोत्यत्मा स्वयं तत्फलमश्नुते ।
स्वयं भ्रमति संसारे स्वयं तस्माद्विमुच्यते।।
(चा. नी. /०६/०९)

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भावार्थ:- जीवात्मा अपने कर्म के मार्ग से जाता है, और जो भी भले बुरे परिणाम कर्मों के आते हैं उन्हें भोगता है। अपने ही कर्मों से वह संसार में बंधता है और अपने ही कर्मों से बन्धनों से छूटता है।

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते।

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उनका जीवन देह से आरम्भ होता है, देह पर समाप्त हो जाता है। लेकिन मनुष्य जो है, आत्मा को छू सकता है और आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है। मानवता का सीधा अर्थ है- अन्य मनुष्यों की पीड़ा को समझें, उनके जीवन में जो श्रेष्ठ दिया जा सकता है, उसका साधन बनें।