आज का पंचांग : हृदयवान बनें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

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आज का विचार

जब मनुष्य की जरूरतें बदल जाती है, मनुष्य के बात करने का ढंग भी बदल जाता है। मनुष्य को सत्य बोलने के लिए, किसी शपथ की आवश्यकता नहीं होती है.!!

आज का भगवद् चिन्तन
हृदयवान बनें

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विश्वास का जन्म सदैव हृदय से ही होता है। बुद्धि की प्रधानता जीवन में अविश्वास का एक प्रमुख कारण है क्योंकि बुद्धि तर्क प्रधान होती है और वह सदैव नयें-नयें तर्कों को जन्म देती रहती है। बुद्धिमान होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन हृदयवान होना उससे भी बड़ी बात और जीवन की अनिवार्यता है। मानव जीवन में जितना भी आंतरिक सुख है, वह बुद्धि के कारण नहीं अपितु हृदय के ही कारण है।

बुद्धि केवल स्वयं का हित सोचती है, लेकिन हृदय द्वारा सर्व मंगल की कामना की जाती है। हमारी सनातन परम्परा में सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना ही हमारे मनीषियों के उदार हृदय को दर्शाती है। जहाँ हृदय है-वहाँ विश्वास है, जहाँ विश्वास है-वहाँ आत्मीयता है, जहाँ आत्मीयता है-वहाँ सर्व मंगल की कामना है और जहाँ सर्व मंगल की कामना है, वहीं ईश्वर की निकटता का मार्ग भी है। जीवन बुद्धि प्रधान नहीं, हृदय प्रधान होना चाहिए।

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 बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:36 ए एमसूर्यास्त07:30 पी एम
चन्द्रोदय06:34 ए एमचन्द्रास्त09:03 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिद्वितीया – 12:52 ए एम, जून 17 तकनक्षत्रआर्द्रा – 04:12 पी एम तक
तृतीयापुनर्वसु
योगवृद्धि – 12:35 ए एम, जून 17 तककरणबालव – 02:39 पी एम तक
ध्रुवकौलव – 12:52 ए एम, जून 17 तक
वारमंगलवारतैतिल
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते2ज्येष्ठ – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमिथुननक्षत्र पदआर्द्रा – 05:38 ए एम तक
सूर्य राशिमिथुनआर्द्रा – 10:55 ए एम तक
सूर्य नक्षत्रमृगशिराआर्द्रा – 04:12 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदमृगशिरापुनर्वसु – 09:31 पी एम तक
  पुनर्वसु – 02:51 ए एम, जून 17 तक
  पुनर्वसु
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 53 मिनट्स 20 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 06 मिनट्स 46 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:33 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 ए एम से 04:56 ए एमप्रातः सन्ध्या04:36 ए एम से 05:36 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:05 पी एम से 01:01 पी एमविजय मुहूर्त02:52 पी एम से 03:47 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:28 पी एम से 07:49 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:30 पी एम से 08:30 पी एम
अमृत काल07:25 ए एम से 08:50 ए एमनिशिता मुहूर्त12:13 ए एम, जून 17 से 12:53 ए एम, जून 17
त्रिपुष्कर योग04:12 पी एम से 12:52 ए एम, जून 17