दशहरा : आचार, शौचाचार और सदाचार से रावण का विनाश निश्चित है

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.

आज नवमी तिथि 12:50 PM तक उपरांत दशमी | नक्षत्र श्रवण 06:02 PM तक उपरांत धनिष्ठा | शूल योग 12:49 AM तक, उसके बाद गण्ड योग | करण कौलव 12:50 PM तक, बाद तैतिल 01:36 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 03:02 PM – 04:28 PM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा.

आज दशहरा है। त्रेतायुग में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर श्रीराम ने रावण का वध किया था। रावण को बुराइयों का प्रतीक माना जाता है। रावण बहुत शक्तिशाली, चतुर और अहंकारी था, इस वजह से ब्रह्मा जी से वरदान मांगते समय भी उसने चतुराई दिखाई थी। रावण की इसी चतुराई की वजह से भगवान विष्णु को राम के रूप में मानव जन्म लेना पड़ा था।

परमात्मा ने मनुष्य को अपनी ही शक्ल देकर संसार में भेजा है, लेकिन हम इंसान भी कमाल के होते हैं। हमने फिर अपनी शक्ल परमात्मा को दे दी और एक घालमेल हो गया। इसी कारण देवस्थान पर स्थापित प्रतिमाएं अपना सच्चा उद्देश्य खो देती हैं। इसमें प्रतिमा का कोई दोष नहीं। हम अपने ढंग से प्रतिमा बनाते हैं और सबने अपने-अपने हिसाब से घोषणा कर रखी है कि मेरा भगवान सबसे अलग है।

यह संवाद सुनकर ईश्वर को बड़ी तकलीफ होती है कि कोई मुझे इस तरह बांट कैसे सकता है। देवी उपासना के नौ दिन यानी नवरात्र का समापन हुआ और आ गया दशहरा। इस दिन रावण का मरना हमारे लिए एक बहुत बड़ा संदेश है। राम ने केवल शस्त्रों से या सेना के सहयोग से रावण को नहीं मारा था। इसके लिए एक अनूठा प्रयोग किया था उन्होंने। देवी भागवत में आचार का वर्णन आया है।

कहा गया है मनुष्य को उठते ही आचार, शौचाचार और सदाचार से अपनी दिनचर्या शुरू करना चाहिए। आचार को प्रमुख धर्म बताया गया है। ‘आचार: प्रथमो धर्म:।’ शौचाचार मतलब स्नान आदि शुद्धि और सदाचार यानी योग। यही प्रयोग राम ने किया था और रावण को मारा था। रावण दुर्गुणों का पुलिंदा है और अरूप रावण के रूप में आज भी हमारे भीतर जिंदा है, पर यदि हमने आचार, शौचाचार और सदाचार बचाया तो उसका विनाश निश्चित है।