दीपावली मनाना आसान है, जीवन में उतारना कठिन!

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.|आज है दिवाली.

आज चतुर्दशी तिथि 11:28 AM तक उपरांत अमावस्या | नक्षत्र स्वाति | आयुष्मान योग 03:02 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग | करण शकुनि 11:28 AM तक, बाद चतुष्पद 11:57 PM तक, बाद नाग | आज राहु काल का समय 04:18 PM – 05:41 PM है | आज चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा |

दीपावली मनाना आसान है, जीवन में उतारना कठिन!

दिवाली मनाना आसान है, लेकिन दिवाली को अपने जीवन के पूरे 365 दिनों में उतारना कठिन है। एक दिन दीप जलाना सरल है, लेकिन जीवन के हर दिन अपने भीतर प्रकाश बनाए रखना एक साधना है।

विज्ञान और तकनीक कितनी ही आगे क्यों न बढ़ जाएँ, भारत की मुहूर्त व्यवस्था और शुभ-अशुभ की सांस्कृतिक चेतना का अपना महत्व बना रहेगा। आज भी बड़े से बड़ा आधुनिक तकनीकी विशेषज्ञ अपने कार्यालय में लैपटॉप खोलने से पहले भगवान की तस्वीर के सामने नतमस्तक होता है। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दृष्टि का वह भाव है, जो हमें बताता है कि ज्ञान और तकनीक के साथ आस्था तथा संस्कार का भी अपना स्थान है।

यही भारत का शुभ है!

लेकिन दीपावली को जीवन में उतारने के लिए केवल पूजा, दीप और उत्सव पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए जीवन में संघर्ष करना पड़ता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। यह प्राकट्य भी सहजता से नहीं हुआ। देवताओं और दैत्यों, दोनों को मिलकर मंथन करना पड़ा। विष निकला, कठिनाइयाँ आईं, लेकिन मंथन जारी रहा। अंततः अमृत और माँ लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ।

जीवन भी एक समुद्र मंथन है। जब परिस्थितियाँ विपरीत होती हैं, जब संघर्ष सामने आता है, जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तब मनुष्य के सामने दो रास्ते होते हैं—या तो वह उदास होकर बैठ जाए या उत्साह के साथ आगे बढ़ता रहे।

याद रखिए, संघर्ष में उदासी स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन उत्साह बनाए रखना एक चुनाव है। यही उत्साह जीवन को आगे बढ़ाता है। यही भीतर के अंधकार को दूर करता है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्साह बनाए रखने के लिए कोई मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए किसी विशेष तिथि, पर्व या शुभ घड़ी की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। उत्साह तो हमारे स्वभाव का हिस्सा होना चाहिए।

दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल घर में दीप जलाना नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच भी अपने भीतर आशा, विश्वास और उत्साह का प्रकाश बनाए रखना है।

आइए, इस बार दीपावली केवल एक दिन न मनाएँ, बल्कि अपने जीवन के प्रत्येक दिन को दीपावली बनाने का संकल्प लें।

क्योंकि दीप जलाने का मुहूर्त हो सकता है, लेकिन जीवन में उत्साह जगाने का मुहूर्त हर पल है!