पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन. आज है षष्टी.
आज षष्ठी तिथि 05:54 AM तक उपरांत सप्तमी. नक्षत्र ज्येष्ठा 06:47 AM तक उपरांत मूल. शोभन योग 10:05 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग. करण कौलव 04:38 PM तक, बाद तैतिल 05:54 AM तक, बाद गर. आज राहु काल का समय 10:46 AM – 12:12 PM है | आज 06:47 AM तक चन्द्रमा वृश्चिक उपरांत धनु राशि पर संचार करेगा.
नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की विधान बताया गया है. महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा था. मान्यता है कि इस नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं. आइए जानते हैं कि मां कात्यायनी की पूजन विधि क्या है.
मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं. उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र और कमल सुशोभित हैं और जबकि उनका वाहन सिंह है. उन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना गया है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से ब्रज की गोपियों ने मां कात्यायनी की उपासना की थी. इसी वजह से मां कात्यायनी की पूजा को विवाह से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए विशेष माना जाता है.
भक्त मानते हैं कि उनकी कृपा से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी हो सकती है. ज्योतिषीय मान्यताओं में मां कात्यायनी का संबंध बृहस्पति ग्रह से भी जोड़ा जाता है.