ज्योतिष ज्ञान: खराब केतु का लक्षण और प्रभाव

ज्योतिषशास्त्र में राहु और केतु (Rahu Ketu)को पाप ग्रह माना गया है। जिनकी कुंडली में केतु दोष होता है, उनके अंदर बुरी आदतें पनपती हैं, काम में बाधा आने लगती है। केतु और राहु के कारण कालसर्प योग भी बनता है। इन सबसे बचने के लिए आपको केतु को अच्छा रखना होगा


हिमशिखर धर्म डेस्क

नवग्रह में राहु और केतु ग्रह के बारे में भी गणना की गई है। राहु और केतु ग्रह को छाया ग्रह माना गया है। किसी भी जातक की कुंडली में राहु और केतु को अशुभ माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान ही राहु और केतु उत्पन्न हुए थे। ये दोनों एक ही राक्षस के दो हिस्से हैं। समुद्र मंथन के दौरान राक्षस रूप बदल कर देवताओं की पंक्ति में लग गया और अमृत ग्रहण कर लिया। अभी उस राक्षस के गले से नीचे अमृत उतरा भी नहीं था, कि भगवान विष्णु ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। इसमें सिर वाला हिस्सा राहु और धड़ वाला हिस्सा केतु कहलाया।

ज्योतिष की मानें तो ये ग्रह कुंडली में गलत स्थान पर होने के कारण ये ग्रह जीवन में संकट उत्पन्न करने लगते हैं। ऐसे में इनके दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपायों को किया जा सकता है।

कैसे होता केतु खराब ?

1. पुरखों का मजाक उड़ाना, अच्छे से श्राद्धकर्म नहीं करना।

2. गृह कलह या घर-परिवार के लोगों से झूठ बोलना।

3. देवी देवताओं का अपमान करना या उनका मजाक उड़ाना।

4. घर का वायव्य कोण खराब है तो केतु भी खराब होगा।

5. संतानों से अच्छा व्यवहार नहीं रखने पर भी केतु खराब हो जाता है।

केतु खराब की निशानी

1. कुंडली में मंगल के साथ केतु का होना बहुत ही खराब माना गया है।

2. चन्द्र के साथ होने से चन्द्रग्रहण माना जाता है।

3. मंदा केतु पैर, कान, रीढ़, घुटने, किडनी और जोड़ के रोग पैदा कर सकता है।

4. मन में हमेशा किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

5. नींद में चमककर उठता है व्यक्ति। नींद कुत्ते जैसी हो जाती है।

केतु की बीमारी

पेशाब की बीमारी।

संतान उत्पति में रुकावट।

सिर के बाल झड़ जाते हैं।

शरीर की नसों में कमजोरी आ जाती है।

केतु के अशुभ प्रभाव से चर्म रोग होता है।

कान खराब हो जाता है या सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है।

कान, रीढ़, घुटने, जोड़ आदि में समस्या उत्पन्न हो जाती है।

केतु को शांत करने के लिए उपाय

  1. केतु ग्रह को शांत करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं।
  2. शनिवार के दिन एक लोटे जल में थोड़ी सी कुशा और दूर्वा रखकर पीपल की जड़ में अर्पित करें।
  3. केतु के प्रकोप को कम करने के लिए भगवान हनुमान, गणेश जी और मां दुर्गा की पूजा करें।
  4. त्रयोदशी तिथि को केतु संबंधी व्रत रख सकते हैं।
  5. केतु ग्रह को शांत करने के लिए उड़द, गर्म कपड़े, लोहा, छाता, कंबल आदि का दान करें।
  6. केतु ग्रह को शांत करने के लिए गाय और कुत्तों को भोजन (चारा, गुड़, रोटी) खिलाना चाहिए।