9 में से 7 सीटें दे दी गयी थी फर्जी सर्टिफिकेट वालों को
एक ही फर्जी सेनानी दादा की तीन पोेतियों को दिखाया बाहर का रास्ता
स्वतंत्रता सेनानी कल्याण समिति ने की थी जांच की मांग
मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर हुई जांच में सर्टिफिकेट निकले फर्जी
स्टेट कोटे की अन्य सीटों पर भी फजीवाड़े की आशंका
देहरादून, प्रदीप बहुगुणा : उत्तराखंड नीट स्टेट कोटे की पांच सीटों को फर्जी सर्टिफिकेट से हथियाने वाले पांच छात्राओं के प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल के सख्त निर्देश पर हुई जांच में प्रमाण प़त्र फर्जी निकले।
रोचक तथ्य यह है कि जिस एसडीएम की ओर से सर्टिफिकेट जारी किए गए थे उन्होंने ही सर्टिफिकेट निरस्त किए। जिनको प्रवेश देने के बाद अब काॅलेजोंने बाहर का रास्ता दिखाया है, उनमें एक ही स्वतंत्रता सेनानी की पोती होने का दावा करने वाली तृप्ति, परी और खुशी शामिल हैं। तृप्ति को हरिद्वार, परी को हल्द्वानी और और खुषी को श्रीनगर मेडिकल काॅलेज में प्रवेश मिला था।
स्टेट कोटे की सीटों में बड़े पैमाने पर फर्जीबाड़े की आशंका जतायी गयी थी। अकेले फ्रीडम फाइटर कोटे की 9 में से 7 सीटें अपात्रों को आवंटित करने का आरोप था। हैरत की बात तो यह थी कि एक ही स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर पुत्र खजान सिंह की पोती होने का दावा करने वाली तृप्ति, परी और खुशी ने अपने तीन अलग-अलग पते दर्षाए थे। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र पर पता 21/1 तरली राजीव नगर तरली कंडोली, स्थायी निवास प्रमाण पत्र पर 32/32 डांडीपुर मोहल्ला देहरादून और मौजूदा पता हरिद्वार और मुज्जफरनगर का दर्शाया गया था लेकिन न तो सीटें आवंटित करने वाले उत्तराखंड शिक्षा विष्वविद्यालय और नही प्रवेष देने वाले मेडिकल काॅलेजों ने ही इस पर ध्यान दिया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देष पर देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चैहान ने सीडीओ और एडीएम को शामिल करते हुए जांच समिति बनायी। समिति की जांच के बाद स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए।
दरसल नीट के प्रथम चरण की काऊंसिलिंग करवाने वाले उतराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने अपनी साइट पर फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत आवेदन करने वाले 24 आवेदकों की जो सूची डाली थी उसीके आधार पर फर्जीवाड़े का पता चला है। ऐसे में अब और श्रेणियों में भी फर्जीवाड़े की पूरी आशंका है। फ्रीडम फाइटर कोटे के दारवेदरों में से अधिकांश ने अंतिम समय में 17 और 18 और 24 अगस्त को प्रमाणपत्र हासिल किए थे। फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट कुछ ने आन लाइन और कुछ ने आफ लाइन हासिल किए हैं। इनमें से अधिकांष कलेक्ट्रेट स्थित ई डिस्ट्रिक्ट केंद्र से जारी किए गए थे। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप बहुगणा ने आन लाइन जार सर्टिफिकेट के नंबर से संबधित आवेदको के ठिकानों पर जाकर गड़बड़ी का पता लगाया।
सबसे आश्चर्यजनक तथ्य तो दून मेडिकल काॅलेज में आवंटित हुई सीट को लेंकर था। यहां के लिए प्रायंजल ने सर्टिफिकेट का जो नंबर डाला था वह जारी भी नहीं हुआ था। और उसके लिए आवेदन किसी शंकुतला सजवाण ने किया था। फिर भी प्रायंजल को सीट आवंटित कर दी गयी।
जिन्हें कोटे का लाभ मिला उनमें से अधिकांश ने 10वीं और 12वीं बिहार, उत्तरप्रदेश याने राज्य से बाहर दूसरे प्रदेशों से था। जिन्होंने फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत सीट का दावा किया था उनमें से चार तो एक ही सेनानी के कथित उत्तराधिकारी थें। उनमें से 3 को पहले ही चरण में अलग-अलग काॅलेजों में सीटें आवंटित कर दी गयीं।
तीन ने अपने को स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का उत्तराधिकारी बताते हुए अपना पता 21/1 राजीव नगर, तरली कंडोली, देहरादून जबकि चैथी ने भी खुद को स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का उत्तराधिकारी बताते हुए अपना पता दूूधा देवी मंदिर, मोथरोंवाला देहरादून लिखाया था।
इन पतों पर जब यह संवाददाता पहुंचा तो वहां इस नाम के कोई भी नहीं मिले आस-पास पूछने पर यह भी पता चला कि वहां कोई स्वतं़त्रता सेनानी नहीं रहा। राजीव नगर, तरली कंडोली, में 21/1 नंबर का कोई घर नहीं है। एक 80 साल के बुजुर्ग इस संवाददताता को काफी पहले परलोक सिधार गए धर्मवीर वर्मा के राजीव नगर, तरली कंडोली के घर पर लेके गए तो धर्मवीर के भतीजे अमन ने बताया कि उसके ताऊ का नाम धर्मवीर जरूर था लेकिन स्वतंत्रता सेनानी नहीं। वे सर्वे आफ इंडिया में चालक थे। उनके दो हीे लड़के है जिनमें से एक सेलाकुई में रहता है और एक का देहांत हो चुका देानों के बच्चे छोटे हैं।
यहां यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष फ्रीडफाइटर कोटे की कुछ सीट पात्र अभ्यर्थी न होने पर खाली भी रहीं थीं जबकि इस वर्ष सरकारी काॅलेजों की 11 में से 9 सीटें पहले ही चरण में आवंटित कर दी गयीं।
स्वतंत्रता सेनानियों को प्रमाण पत्र जिलाधिकारी द्वारा जारी किए जाते हैं और उसमें सेनानी का मूल निवास, वर्तमान पता, शासनादेश संख्या, स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन पट्टा संख्या का जिक्र होता है। स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारियों को प्रमाण पत्र एसडीएम के यहां से जारी होते हैं । उनमें भी उपरोक्त के अलावा लाभार्थी का भी पूर्ण विवरण यथा स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन पट्टा संख्या, उससे संबंध, लाभार्थी की आधार संख्या भी दर्ज होती है। यह जिला कार्यालय में उपलब्घ स्वतंत्रता सेनानी सूची और कई स्तर पर भौतिक जांच के बाद ही जारी किए जाते हैं।
स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण समिति और वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप बहुगुणा ने जिलाधिकरी और चिकित्स शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर पूरे फर्जीवाड़े की जांच की मांग की थी। उन्होंने इस वर्ष स्टेट कोटा फ्रीडफाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने वालों के फ्रीडम फाइटर और डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जांच करवाने की मांग की थी जिससे वास्तविक हकदारों को उनका हक मिल सके। अकेले फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट की जोच से 5फर्जी निकल गए।स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति (रजि.) के राष्ट्रीय महासचिव, जितेन्द्र रघुवंशी का कहना है कि उन्होंने एक महीने पहले भी मुख्यमंत्री से मिलकर इस तरह की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी।