दून मेडिकल काॅलेज में बिना प्रमाणपत्र के ही सीट आवंटित
स्वतंत्रता सेनानी कल्याण समिति ने की जांच की मांग
मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा करायी जा रही है जांच, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
प्रदीप बहुगुणा देहरादून। उत्तराखंड नीट स्टेट कोटे की सीटों पर बड़े पैमाने पर फर्जीबाड़े की आशंका है। अकेले फ्रीडम फाइटर कोटे की 9 में से 7 सीटें अपात्रों को आवंटित कर दी गयीं। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि प्रकरण की निदेशक स्तर से जांच करायी जा रही है दोषी बख्शे नहीं जाएंगे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नीट के प्रथम चरण की कांऊंसिलिंग करवाने वाले उतराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने अपनी साइट पर फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत आवेदन करने वाले 24 आवेदकों की जो सूची डाली है उससे फर्जीबाड़े का पता चला है। ऐसे में और श्रेणियों में भी फर्जीबाड़े की पूरी आशंका है। फ्रीडम फाइटर कोटे के दारवेदरों में से अधिकांश ने अंतिम समय में 17 और 18 अगस्त को प्रमाणपत्र हासिल होने किया है। फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट कुछ ने आॅन लाइन और कुछ ने आॅफ लाइन हासिल किए हैं। आॅन लाइन वालों के सर्टिफिकेट नंबर से गड़बड़ी का पता चला। डोमिसाइल जारी होने की केवल तारीख का जिक्र है जिससे उसका पता नहीं लगाया जा सकता।
सबसे आश्चर्यजनक तो दून मेडिकल काॅलेज में आवंटित सीट को लेंकर है। यहां के लिए प्रायंजल ने सर्टिफिकेट का जो नंबर डाला है वह जारी भी नहीं हुआ है। और उसके लिए आवेदन किसी शंकुतला सजवाण ने किया है। फिर भी प्रायंजल को सीट मिल गयी।
जिन्हें कोटे का लाभ मिला है उनमें से अधिकांश ने 10वीं और 12वीं बिहार, उत्तरप्रदेश याने राज्य से बाहर दूसरे प्रदेशों से की है। अन्य जिन्होंने फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत सीट का दावा किया है उनमें से चार तो एक ही सेनानी के कथित उत्तराधिकारी हैं। जिनको अलग-अलग काॅलेजों में सीटें मिलीं।
इन्होंने फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत सरकारी काॅलेजों की सीटों पर अपना दावा पेश किया था। तीनों ने अपने को स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का उत्तराधिकारी बताते हुए अपना पता 21/1 राजीव नगर, तरली कंडोली, देहरादून जबकि चैथी ने भी खुद को स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का उत्तराधिकारी बताते हुए अपना पता दूूधा देवी मंदिर, मोथरोंवाला देहरादून लिखाया है।
इन पतों पर जब यह संवाददाता पहुंचा तो वहां इस नाम के कोई भी नहीं मिले आस-पास पूछने पर यह भी पता चला कि वहां कोई स्वतं़त्रता सेनानी नहीं रहा। राजीव नगर, तरली कंडोली, में 21/1 नंबर का कोई घर नहीं है। एक 80 साल के बुजुर्ग इस संवाददताता को काफी पहले परलोक सिधार गए धर्मवीर वर्मा के राजीव नगर, तरली कंडोली के घर पर लेके गए तो धर्मवीर के भतीजे अमन ने बताया कि उसके ताऊ का नाम धर्मवीर जरूर था लेकिन स्वतंत्रता सेनानी नहीं। वे सर्वे आॅफ इंडिया में चालक थे। उनके दो हीे लड़के है जिनमें से एक सेलाकुई में रहता है और एक का देहांत हो चुका देानों के बच्चे छोटे हैं।
इस बारे में एक तथ्य यह भी है कि पिछले वर्ष फ्रीडफाइटर कोटे की कुछ सीट पात्र अभ्यर्थी न होने पर खाली भी रहीं थीं जबकि इस वर्ष सभी सीटें आवंटित कर दी गयी हैं। इस वर्ष स्टेट कोटा फ्रीडफाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने वालों में अधिकांश ने अंतिम समय में डोमिसाइल और फ्रीडफाइटर आश्रित प्रमाण पत्र आॅनलाइन हासिल किए हैं। ऐसे में उनके प्रमाण पत्र संदेह के घेरे में हैं।
स्वतंत्रता सेनानियों को प्रमाण पत्र जिलाधिकारी द्वारा जारी किए जाते हैं और उसमें सेनानी का मूल निवास, वर्तमान पता, शासनादेश संख्या, स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन पट्टा संख्या का जिक्र होता है। स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारियों को प्रमाण पत्र एसडीएम के यहां से जारी होते हैं । उनमें भी उपरोक्त के अलावा लाभार्थी का भी पूर्ण विवरण यथा स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन पट्टा संख्या, उससे संबंध, लाभार्थी की आधार संख्या भी दर्ज होती है। यह जिला कार्यालय में उपलब्घ स्वतंत्रता सेनानी सूची और कई स्तर पर भौतिक जांच के बाद ही जारी किए जाते हैं।
स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण समिति के उपाध्यक्ष प्रदीप बहुगुणा ने जिलाधिकरी और चिकित्स शिक्षा मं़त्री को पत्र लिखकर पूरे फर्जीबाड़े की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि इस वर्ष स्टेट कोटा फ्रीडफाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने वालों के फ्रीडम फाइटर और डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जांच करवायी जाय जिससे वास्तविक हकदारों को उनका हक मिल सके। उधर स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति (रजि.) के राष्ट्रीय महासचिव, जितेन्द्र रघुवंशी का कहना है कि उन्होंने एक महीने पहले ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस तरह की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी।
इनसेट आइटम:
एक ही दादा की फ्रीडफाइटर कोटे से दो पातियांे को मिला प्रवेश एक को नहीं
स्वतं़त्रता सेननी संगठन द्वारा फ्रीडफाइटर कोटे से जिन आवेदकों के फर्जी प्रमाण पत्र की आशंका से प्रवेश की संभावना जतायी गयी थी उनमें से प्रांयजल, तृप्ति और जान्हवी को प्रवेश नहीं मिला है। जबकि परी को हल्द्वानी और खुशी को श्रीनगर मेडिकल कालेज में प्रवेश मिल गया है। तृप्ति परी और खुशी की ही चचेरी बहन है। उसको हरिद्वार मेडिकल काॅलेज में सीट आवंटित हुई थी। उनकी एक और बहन स्वाति ने भी खुद को धर्मवीर वर्मा पु़त्र खजान सिंह का उत्तराधिकारी बताते हुए नीट में फ्रीडफाइटर कोटे से आवेदन किया था।