पूर्व सचिव भारत सरकार भाई कमलानंद पहुंचे सिक्किम, की यह अपील

भाई कमलानंद (डॉ. कमल टावरी)

पूर्व सचिव भारत सरकार

सभी दोस्तों को प्रणाम.
मैं भाई कमलानंद (डा. कमल टावरी) पूर्व सचिव भारत सरकार और कुलपति पंचगव्य विद्यापीठम लगभग 80 साल का हो गया हूं। पूरे भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व का ही समय-समय पर भ्रमण करता रहता हूं। हम लोग बिना किसी सरकारी मदद के समाज कैसे समृद्ध हो, सभी स्वस्थ और आनंदित हो एवं अधूरे सपने पूरे करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

  • मैं अभी सिक्किम की यात्रा पर हूं। यहां सिलिगुडी, दार्जिलिंग आदि का भ्रमण कर रहा हूं। सभी जगह पर एक ही हालात दिखाई पड़ते हैं। गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने से कुछ नया नहीं हो सकेगा, मुझे ऐसा दिखलाई नहीं पड़ता है। गाय के पंचगव्य से बहुत अच्छे-अच्छे उत्पाद बन रहे हैं। यदि हम गाय के प्रोडक्ट को बेचने के लिए मार्केटिंग पर जोर दें और उत्पादों की क्वालिटी पर ध्यान दे तो गाय का संरक्षण हो सकता है।
  • स्थानीय संसाधन, स्थानीय भाषा, संस्कृति, विचार, जीवन शैली, सस्कार, स्वभाव, स्थानीय बाजार, स्थानीय भंडारण आदि एक दूसरे से परस्पर जुड़े हुए हैं। वैज्ञानिक परीक्षण एवं अनुभव से यही सिद्ध है कि देशी गायों पर जो भी शास्त्रों में लिखा गया है वह समग्रता, संतुष्टि, प्रेम, व्यक्तित्व के लिए अनिवार्य है। पर्यावरणपूरक धंधे, व्यवसाय, रोजगा, जीवनशैली या सोच समझ के लिए देशी गाय आधारित विकास अनिवार्य है।
  • हमें इस यात्रा पर एक उद्यमी महिला रास्ते में मिली थी, जो अपने प्रयासों से गौ संरक्षण पर बहुत अच्छा कार्य कर रही है। ऐसी मातृ शक्तियों का सम्मान किया जाना चाहिए, जिससे अन्य लोग प्रेरणा लेकर कार्य कर सकें। मेरे हिसाब से संतों से समृद्धि, गायों से वृद्धि, चलो गांव की ओर। निराशा छोड़ो और जड़ो से जुड़ो। हमारी क्षमताओं का आर्थिक सामाजिक, और व्यावहारिक पहलु का सदुपयोग हो सकेगा। इसी तरह 100 देशों में कुबड वाली गाय हैं। अगर इन सब गायों के संरक्षण के लिए एक नए आर्थिक, सामजिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दें और सरकार से पैसा मांगने के बजाए नीतियां मांगने की बात करें। महाराष्ट्र-यूपी सरकार को तो घेर लें। क्योंकि यहां पर गाय का नाम तो लिया जाता है लेकिन जमीन पर असर दिखलाई नहीं पड़ता।
  • जितनी भी गौशालाएं और गौ आयोग हैं, उनका वृंदावन में एक मीटिंग की जा सकती है। सभी अपने अपने खर्चे पर आएंगे और अपने रहने का इंतजाम करेंगे। या फिर अहमदाबाद में भी यह मीटिंग रखी जा सकती है।
  • अब यह समय आ गया है कि भाई कमानंद के सुझाव, विचारों के आधार पर मिलकर काम करें।
  • ब्रिगेडियर राजाराम जी ने खच्चर के गोबर के साथ खाद बनवाई थी। यदि उसका कोई पेपर है तो उसको मार्केटिंग द अनमार्केटेड के अभियान में लिया जा सकता है।
  • 80 साल के लोगों के अनुभवों को लेकर कैसे एक नई ब्रिगेड शुरू की जाए, इस पर भी काम किया जाना चाहिए। गुजरात में गोमूत्र पर बहुत काम हो गया है। वहां पर करोड़ों का इंवेस्टमेंट हो रहा है। हम सभी मिलकर काम करें तो बहुत बड़ी कांति की शुरूआत हो सकती है। श्री शंकर लाल जी ने गोबर गोमूत्र से डीएपी का विकल्प बना लिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *