पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष दशमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ |
आज दशमी तिथि 06:59 PM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र स्वाति 07:51 PM तक उपरांत विशाखा | सिद्ध योग 08:35 PM तक, उसके बाद साध्य योग | करण गर 06:59 PM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 09:10 AM – 10:51 AM है | आज चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – आषाढ़
- अमांत – आषाढ़
तिथि
- शुक्ल पक्ष दशमी – Jul 04 04:32 PM – Jul 05 06:59 PM
- शुक्ल पक्ष एकादशी – Jul 05 06:59 PM – Jul 06 09:15 PM
नक्षत्र
- स्वाति – Jul 04 04:50 PM – Jul 05 07:51 PM
- विशाखा – Jul 05 07:51 PM – Jul 06 10:41 PM
परमात्मा सबके भीतर विराजित है। फर्क यह है कि परमात्मा तो सबके साथ है, लेकिन हम परमात्मा के साथ कितने हैं? जो अच्छे होते हैं, वे परमात्मा के साथ होते हैं। और जो बुरे होते हैं, परमात्मा तो उनके साथ होता है, पर वो परमात्मा के साथ नहीं होते।
परमात्मा का एहसास करने के लिए जो सरल तरीका अच्छे लोग अपनाते हैं, वो है अपनी आत्मा तक जाना। परमात्मा से जुड़ने और आत्मा तक जाने के जो भी तरीके हैं, उनमें से एक है- ईश्वर की कथा सुनते रहिए। आपके श्रवण का जो भी ढंग हो, पर चौबीस घंटे में कुछ ना कुछ भगवान का नाम सुनिए, कथा सुनिए।
तुलसीदास जी ने लिखा है- ते जड़ जीव निजात्मक घाती। जिन्हहि न रघुपति कथा सोहाती।। जिन्हें रघुनाथ जी की कथा नहीं सुहाती, वे मूर्ख जीव तो अपनी आत्मा की हत्या करने वाले हैं। जरूरी नहीं कि पण्डाल में बैठकर किसी महात्मा की कथा ही सुनें। ईश्वर की कथा सुनने का अर्थ है जीवन में पॉजिटिविटी लाना। वो जिस तरीके से जीवन में आए, कर जाइए।