पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन. आज है सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत, शरद पूर्णिमा, काजोगरा पूजा और सत्य व्रत.
आज चतुर्दशी तिथि 11:56 AM तक उपरांत पूर्णिमा. नक्षत्र रेवती 07:22 PM तक उपरांत अश्विनी. हर्षण योग 05:21 PM तक, उसके बाद वज्र योग. करण वणिज 11:56 AM तक, बाद विष्टि 10:52 PM तक, बाद बव. आज राहु काल का समय 04:24 PM – 05:49 PM है. आज 07:22 PM तक चन्द्रमा मीन उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा.
अब मन पर काम करने का समय आ गया है।
तन कोमल हो, तो फूलों की पंखुड़ियाँ भी चोट पहुँचा सकती हैं; लेकिन मन मजबूत हो, तो चट्टानों से भी रास्ते निकाले जा सकते हैं।
आज हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है। किसी के पास संसाधनों की कमी है, किसी के पास अवसरों की, तो किसी के पास मानसिक शांति की। इन सबके बीच एक विडंबना यह भी है कि मन को मजबूत बनाने और स्वयं को समझने के लिए लोगों के पास समय ही नहीं है।
टेक्नोलॉजी का उद्देश्य हमारा समय बचाना था। हमने समय तो बचाया, लेकिन उस बचे हुए समय को भी भागदौड़, सूचनाओं और व्यस्तताओं से भर दिया। हमारे काम करने की गति बढ़ गई, लेकिन क्या मन को भी उतना ही सुकून मिला? हमारे पास सुविधाएँ बढ़ीं, लेकिन क्या स्वयं के साथ बैठने की क्षमता भी बढ़ी?
सच यह है कि जीवन की हर समस्या बाहरी साधनों से हल नहीं होती। कुछ समस्याओं के समाधान के लिए भीतर उतरना पड़ता है।
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हम व्यायाम करते हैं, घर को व्यवस्थित रखने के लिए समय देते हैं और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए योजनाएँ बनाते हैं। लेकिन जिस मन के सहारे हम पूरा जीवन जीते हैं, उसकी देखभाल के लिए कितना समय निकालते हैं?
अब समय आ गया है कि हम मन को समझने, विचारों को दिशा देने, भावनाओं को संतुलित करने और विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को संभालने का अभ्यास करें।
क्योंकि मजबूत मन का अर्थ कठिनाइयों का न होना नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच भी संतुलित बने रहने की क्षमता है।
टेक्नोलॉजी हमें समय दे सकती है, सुविधाएँ दे सकती है और हमारी कार्यक्षमता बढ़ा सकती है; लेकिन उस समय का सार्थक उपयोग हमें स्वयं ही करना होगा।
अब केवल जीवन को आसान बनाने पर नहीं, स्वयं को सक्षम बनाने पर भी काम करना होगा। तन की शक्ति हमें चलाती है, लेकिन मन की दृढ़ता हमें गिरकर फिर उठना सिखाती है।