कृषि कानून की वापसी: देश के छोटे व गरीब किसानों के लिए आज काला दिन

गोपाल बहुगुणा

सरकार द्वारा किसान बिल वापसी से देश में जो संदेश जाएगा वह सकारात्मक नहीं रहेगा। क्योंकि भविष्य में सरकार द्वारा जो भी अच्छे बिल कानून बनाए जाएंगे, इस कानून की तरह ही दबाव बनाकर अपनी मर्जी से बिल को निरस्त करवाने के लिए सरकार को मजबूर किया जाएगा। कृषि कानूनों को वापस लेना एक खराब निर्णय है। देश के छोटे व गरीब किसानों के लिए आज काला दिन जैसा है।

सरकार द्वारा तैयार किया गया यह किसान बिल बहुत ही पारदर्शिता से बनाया गया था। इसमें किसी भी प्रकार से किसान के अहित होने की बात नहीं थी। यह कानून किसानों को बिचौलियों से बचाने में कारगर साबित हो सकता था। कुल मिलाकर देखा जाय तो इस बिल को निरस्त होने से बिचौलियों की जीत हुई है। अब किसान स्वतंत्र रूप से अपने उत्पादों को बाजार में नहीं बेच पाएंगे। कहीं न कहीं उसे बिचौलियों का सहारा लेना ही पड़ेगा और ऐसे में किसानों का शोषण निश्चित है।

आंदोलनकारी किसानों को भी यह सोचना चाहिए कि किसान हित में वर्तमान सरकार ने अच्छा कार्य कर रही है। किसान निधि से लेकर किसानों के लिए सब्सिडी देकर सरकार ने महंगे कृषि उपकरण कम दामों में किसानों को उपलब्ध कराए हैं।

यह भी सच है कि वर्तमान सरकार किसानों के हित के लिए संकल्पित है। लेकिन इस देश में कुछ लोगों की नियति बन चुकी है कि देश हित में कम और स्वहित में ज्यादा सोचते हैं। देश में आंदोलनों का प्रचलन बढ़ना देश हित में नहीं हो सकता है। सरकार को चाहिए कि इस तरह के संगठनात्मक आंदोलन प्रतिबंधित होने चाहिए, नहीं तो आगे भविष्य में भी किसान बिल जैसे अन्य जन हित के कानून स्वाहा होते रहेंगे।