नवरात्रि की अष्टमी तिथि आज: शिव जी से मिला था देवी पार्वती को गौरी नाम, अष्टमी पर होती है महागौरी की पूजा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी, सिद्धार्थि संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.

आज सप्तमी तिथि 08:28 AM तक उपरांत अष्टमी | नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 12:48 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा | सुकर्मा योग 11:55 PM तक, उसके बाद धृति योग | करण वणिज 08:28 AM तक, बाद विष्टि 09:42 PM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 04:29 PM – 05:55 PM है | आज 07:33 PM तक चन्द्रमा धनु उपरांत मकर राशि पर संचार करेगा.

आज रविवार को नवरात्रि की अष्टमी तिथि है। नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना व विधि पूर्वक पूजन किए जाने का विधान है। महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए माना जाता है कि अष्टमी तिथि पर महागौरी को प्रसन्न करने से भगवान शिव सहित गणेश जी और देव कार्तिकेय भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन हवन और कन्या पूजन करने का भी विधान है।

मां महागौरी का स्वरूप और धार्मिक महत्व

मां महागौरी को नवदुर्गा का आठवां स्वरूप माना जाता है। इनका वर्ण अत्यंत गौर और आभा चंद्रमा के समान उज्ज्वल बताई गई है। देवी के वस्त्र और आभूषण भी सफेद रंग के माने जाते हैं, इसलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा जाता है। मां महागौरी का वाहन वृषभ यानी बैल है, जिसके कारण उनका एक नाम वृषारूढ़ा भी है।

देवी की चार भुजाएं हैं। उनके एक दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और दूसरे में त्रिशूल होता है। बाएं हाथों में डमरू और वर मुद्रा सुशोभित हैं। अभय मुद्रा भक्तों को भय से मुक्ति का संदेश देती है, जबकि वर मुद्रा कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है।

महागौरी चंद्र, शंख और कंद फूल की तरह श्वेत यानी गौरी हैं।

देवी के सभी वस्त्र और आभूषण भी सफेद हैं।

देवी की चार भुजाएं हैं। देवी के ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभयमुद्रा, नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है।

ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में वरमुद्रा है।

देवी का वाहन वृषभ यानी बैल है। देवी इस स्वरूप में शांत दिखाई देती हैं।

इनकी पूजा करने से भक्त के नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।