पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिन्तन
माँ कात्यायनी नमोऽस्तुते
नवरात्रि के छठवें दिवस में माँ कात्यायनी का पूजन किया जाता है। माँ दुर्गा द्वारा अपने भक्तों के व लोकमंगल के लिए विभिन्न चरित्र किए जाते हैं। माँ की प्रत्येक लीला मानव जीवन को कुछ विशेष संदेश प्रदान करती हुई अपने भक्तों के कल्याण के लिए ही होती हैं। ऐसे ही माँ दुर्गा द्वारा रक्तबीज असुर का जिस तरह से नाश किया जाता है, वह बड़ा ही प्रतीकात्मक व संदेशप्रद है। यह रक्तबीज कुछ और नहीं हमारी कामनाएँ ही हैं, जो एक के बाद एक जन्म लेती रहती हैं।
एक इच्छा पूर्ण हुई कि दूसरी और तीसरी अपने आप जन्म ले लेती हैं। हम निरंतर इनसे संघर्ष भी करते रहते हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है क्योंकि हमारे अधिकतर प्रयास इच्छापूर्ति की दिशा में होते हैं, इच्छा दमन की दिशा में नहीं। रक्तबीज तब तक नहीं मरता जब तक उसके रक्त की एक भी बूँद शेष रहती है। ऐसे ही हमें भी हमारी अकारण की इच्छाओं और कामनाओं को पी जाना होगा जो व्यर्थ हमें दुःखी और व्यथित करती रहती हैं। कामनाओं को पी जाना अर्थात उन्हें विवेकपूर्ण नियंत्रित करना है
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:32 ए एम | सूर्यास्त | 06:45 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 10:07 ए एम | चन्द्रास्त | 12:42 ए एम, मार्च 25 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | षष्ठी – 04:07 पी एम तक | नक्षत्र | रोहिणी – 07:04 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| सप्तमी | मृगशिरा | ||
| योग | प्रीति – 09:07 ए एम तक | करण | तैतिल – 04:07 पी एम तक |
| आयुष्मान् – 06:02 ए एम, मार्च 25 तक | गर – 02:57 ए एम, मार्च 25 तक | ||
| सौभाग्य | वणिज | ||
| वार | मंगलवार | ||
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 10 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | वृषभ – 06:17 ए एम, मार्च 25 तक | नक्षत्र पद | रोहिणी – 07:55 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| मिथुन | रोहिणी – 01:30 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मीन | रोहिणी – 07:04 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद | मृगशिरा – 12:40 ए एम, मार्च 25 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद – 02:31 ए एम, मार्च 25 तक | मृगशिरा – 06:17 ए एम, मार्च 25 तक | |
| उत्तर भाद्रपद | मृगशिरा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 13 मिनट्स 29 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 45 मिनट्स 23 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:39 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:58 ए एम से 05:45 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:21 ए एम से 06:32 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:14 पी एम से 01:03 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:30 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:44 पी एम से 07:08 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:45 पी एम से 07:56 पी एम |
| अमृत काल | 04:06 पी एम से 05:35 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:15 ए एम, मार्च 25 से 01:02 ए एम, मार्च 25 |
| द्विपुष्कर योग | 07:04 पी एम से 06:31 ए एम, मार्च 25 | रवि योग | 06:32 ए एम से 07:04 पी एम |