आज का पंचांग : वही काम करें जो शास्त्रों में लिखा है

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

पौष शुक्ल पक्ष षष्ठी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, पौष | आज है षष्टी|

आज षष्ठी तिथि 01:43 PM तक उपरांत सप्तमी | नक्षत्र शतभिषा 09:00 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा | सिद्धि योग 02:00 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण तैतिल 01:44 PM तक, बाद गर 01:31 AM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 11:08 AM – 12:27 PM है | आज 03:10 AM तक चन्द्रमा कुंभ उपरांत मीन राशि पर संचार करेगा |

जिन्हें जीवन में आनंद प्राप्त करना हो, उन्हें जीवन यात्रा में एक चौराहे का ज्ञान होना चाहिए। इस चौराहे को समझने के लिए हिंदी वर्णमाला के पहले चार शब्द पकड़ लीजिए- अ, आ, इ, ई। अ का मतलब अन्न, आ यानी आवेश, इ से इंद्रियां और ई से ईश्वर।

आपको इतना करना है कि अन्न को संतुलन से जोड़िए। भोजन बहुत संतुलित करिए। आवेश का निपटारा सहनशीलता से किया जाए। हमारे शरीर में दस इंद्रियां हैं। सजगता से उनका उपयोग करें और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखें। जब भी आपको कंफ्यूजन हो, आजकल तो लोग तकनीकी साधनों से रास्ता ढूंढ लेते हैं।

लाइव लोकेशन से पहुंच जाते हैं। पर यदि इस यात्रा में आप कभी भटक जाएं तो कृष्ण जी की बात याद रखें कि प्रमाण शास्त्रों को मानना। उन्होंने गीता के 16वें अध्याय में अर्जुन से कहा- शास्त्रम् प्रमाणम् ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तम् कर्म कर्तुमिहार्हसि, यानी वही काम कर जो शास्त्रों में लिखा है। सीधी-सी बात पकड़ लें और चल पढ़ें हिंदी वर्णमाला के चार अक्षरों को समझकर।