आज का पंचांग : अच्छाई ही जीतेगी

हिमशिखर खबर ब्यूरो

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पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

योग  भगाए रोग, यह कहावत सदियों पुरानी है। हमारे ऋषि-मुनि नियमित योग करते थे और स्वस्थ रहते हुए लंबा जीवन जीते थे। योग हमारे मन-मस्तिष्क के साथ-साथ शरीर को भी फिट रखता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए योग अत्यंत आवश्यक है। योग के महत्व को देश ने ही नहीं बल्कि सारी दुनिया ने भी माना है। इसलिए सारी दुनिया 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाती है।

देश और दुनिया में योग के महत्व को बरकरार रखने के लिए हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। योग करने का सबसे ज्यादा श्रेय हमारे देश के ऋृषि- मुनियों को जाता है। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की वजह ये हैं कि 21 जून उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन होता है। भारतीय परंपरा के मुताबिक, ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन होता है।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष सप्तमी, रोद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, ज्येष्ठ |

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आज सप्तमी तिथि 03:20 PM तक उपरांत अष्टमी | नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 09:31 AM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी | सिद्धि योग 11:21 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण वणिज 03:21 PM तक, बाद विष्टि 03:25 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 05:30 PM – 07:11 PM है | आज 03:39 PM तक चन्द्रमा सिंह उपरांत कन्या राशि पर संचार करेगा |

आज का भगवद् चिन्तन
अच्छाई ही जीतेगी

बुराई ही जीवन के विध्वंस का मूल है। किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनीति पूर्वक किए जाने वाले प्रयास ही जीवन में बुराइयों का प्रवेश कराते हैं। बुराई वो तलवार है, जो एक फल की चाह में पूरे वृक्ष को ही काट डालती है। बुराई जीतकर भी सदैव अंत में हार जाती है और अच्छाई आज हारती हुई दिखाई देने पर भी अंत में विजय अवश्य प्राप्त करती है।

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संयम एवं सदाचार का आश्रय ही किसी के जीवन में अच्छाई का प्रवेश कराके उसकी विजय सुनिश्चित करते हैं। अच्छाई एक शांत नदी की तरह होती है, जो न केवल प्यास बुझाती है अपितु जीवन के सृजन में मूल तत्व की भूमिका का निर्वाह भी करती है। निश्चित ही जीवन में अच्छाई होगी तो वह एक दिन सृजन का रूप अवश्य ले लेगी।अच्छाई ही वो सीढ़ी है जो आपको किसी के हृदय तक पहुँचा देती है। अच्छाई में जीवन जीना, सच्चाई में जीवन जीना ही है।