आज का पंचांग : सीखें और सिखायें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का विचार

जब लक्ष्यों को पाना मुश्किल हो तो लक्ष्यों को न बदले, बल्कि अपने प्रयासों में बदलाव करे। आपको वह नहीं मिलता, जो आप चाहते है, आप जिसके योग्य है, वहीं मिलेगा, यही विधान है.!

आज का भगवद् चिंतन
सीखें और सिखायें

पहले स्वयं सीखकर ही दूसरों को सिखाया जा सकता है। प्रकृति का कण-कण मनुष्य जीवन को एक प्रेरणा प्रदान करता है। ये संपूर्ण प्रकृति एक पाठशाला ही तो है। बिना प्रेरणा लिए जीवन प्रेरक नहीं बन सकता है। हम दूसरों को प्रेरणा दें, उससे पूर्व यह आवश्यक हो जाता है, कि हम दूसरों से प्रेरणा लेना भी सीखें। जिसने अपने जीवन में दूसरों से प्रेरणा लेने का प्रयास किया उसका स्वयं का जीवन भी एक दिन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाता है।

प्रेरणा पर्वत से लेनी चाहिए जिसके मार्ग में अनेक आंधी और तूफान आते हैं, लेकिन उसके स्वाभिमानी मस्तक को नहीं झुका पाते। प्रेरणा लहरों से लेनी चाहिए जो गिरकर फिर उठ जाती हैं और अपने लक्ष्य तक पहुँचे बिना कहीं रुकती नहीं हैं। प्रेरणा बादलों से लेनी चाहिये जो समुद्र से जल लेते हैं और सूखे रेगिस्तान में बरसा देते हैं। प्रेरणा वृक्षों से लेनी चाहिए, फल लग जाने के बाद जिनकी डालियाँ स्वतः झुक जाया करती हैं। जो प्रकृति से सीख लेकर अपनी प्रवृत्ति को सुधार लेता है, उसी का जीवन महान भी बन पाता है

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:16 ए एमसूर्यास्त06:53 पी एम
चन्द्रोदय11:59 पी एमचन्द्रास्त09:10 ए एम
पञ्चाङ्ग
तिथिपञ्चमी – 04:34 पी एम तकनक्षत्रज्येष्ठा – 05:54 ए एम, अप्रैल 08 तक
षष्ठीमूल
योगव्यतीपात – 04:17 पी एम तककरणतैतिल – 04:34 पी एम तक
वरीयान्गर – 05:48 ए एम, अप्रैल 08 तक
वारमंगलवारवणिज
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते24चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिवृश्चिक – 05:54 ए एम, अप्रैल 08 तकनक्षत्र पदज्येष्ठा – 09:40 ए एम तक
धनुज्येष्ठा – 04:25 पी एम तक
सूर्य राशिमीनज्येष्ठा – 11:09 पी एम तक
सूर्य नक्षत्ररेवतीज्येष्ठा – 05:54 ए एम, अप्रैल 08 तक
सूर्य नक्षत्र पदरेवती – 02:40 पी एम तकमूल
रेवती  
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 36 मिनट्स 25 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 22 मिनट्स 29 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:34 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:45 ए एम से 05:31 ए एमप्रातः सन्ध्या05:08 ए एम से 06:16 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:09 पी एम से 01:00 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:51 पी एम से 07:14 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:53 पी एम से 08:01 पी एम
अमृत काल08:01 पी एम से 09:49 पी एमनिशिता मुहूर्त12:11 ए एम, अप्रैल 08 से 12:57 ए एम, अप्रैल 08
रवि योग05:54 ए एम, अप्रैल 08 से 06:15 ए एम, अप्रैल 08 

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