पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
सुबह सैर करने वालों की आजकल खूब संस्थाएं बन गई हैं। लोग मिलकर ‘वॉक’ करते हैं, लेकिन उससे ज्यादा ‘टॉक’ करते हैं। जिन्हें शारीरिक ऊर्जा के साथ-साथ मानसिक ऊर्जा भी चाहिए, उन्हें सैर करते समय बातचीत नहीं करनी चाहिए। विचार शून्य सैर जीवन के हर क्षेत्र में आपकी सहनशक्ति बढ़ा देगी। लेकिन लोग घूमते समय खूब बतियाते हैं, बाकी कुछ लोग तो बतियाने के लिए ही घूमते हैं।
अब ये तो ऐसा ही हुआ कि सुबह का पहला कदम शोर के साथ उठा लिया है। खामोश रहते हुए सैर करें। और जब भी सैर करें, खासतौर पर सुबह, तो आपके साथ सिर्फ आपके विचार हों, फिर धीरे-धीरे अपने कदमों पर ध्यान दें। कदमों के साथ विचार शून्य होकर एकाग्र रहकर खुद से जुड़ते हुए सैर करें। अगर बहुत सारे लोगों के साथ चल भी रहे हों, तो प्रयास करें कि खामोशी उतरे।
सुबह की सैर व्यावहारिक नहीं, भावनात्मक होनी चाहिए। यह चलता-फिरता क्लब शारीरिक स्वास्थ्य में तो मददगार हो सकता है, पर मानसिक स्वास्थ्य के लिए मौन कदम-ताल बड़ा उपयोगी है।
श्रावण शुक्ल पक्ष नवमी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण |
आज नवमी तिथि 09:42 AM तक उपरांत दशमी | नक्षत्र विशाखा 06:35 AM तक उपरांत अनुराधा | शुक्ल योग 06:24 AM तक, उसके बाद ब्रह्म योग | करण कौलव 09:42 AM तक, बाद तैतिल 10:45 PM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 05:26 PM – 07:03 PM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – श्रावण
तिथि
- शुक्ल पक्ष नवमी – Aug 02 07:23 AM – Aug 03 09:42 AM
- शुक्ल पक्ष दशमी – Aug 03 09:42 AM – Aug 04 11:42 AM
नक्षत्र
- विशाखा – Aug 02 03:40 AM – Aug 03 06:35 AM
- अनुराधा – Aug 03 06:35 AM – Aug 04 09:12 AM
आज का भगवद् चिन्तन
शिव तत्व विचार
भगवान शिव का एक नाम “आशुतोष” भी है। “आशुतोष” अर्थात अतिशीघ्र एवं बहुत कम में प्रसन्न हो जाने वाले। एक लोटा जल चढ़ाने मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाया करते हैं और भोग में भाँग और धतूरे जैसी वस्तुओं को पाकर भी रीझ जाते हैं।दूसरों से थोड़ा सा लेकर भी उन्हें अधिक से अधिक देने का भाव ही आशुतोष महादेव के जीवन की सीख है।
आज व्यक्ति यह नहीं सोच रहा है, कि मैंने दूसरों को क्या दिया अपितु उसका समग्र चिन्तन इतना ही है, कि मुझे दूसरों ने क्या दिया है। भगवान महादेव लेते बहुत थोड़ा हैं और अपना सर्वस्व अपने भक्त के ऊपर लुटा देते हैं। वही सामर्थ्यवान है और बड़ा है जो दूसरों से लेने का नहीं देने का भाव रखता है। केवल आयु में ही नहीं आचरण में भी बड़े होने का प्रमाण दो। दूसरों से अपेक्षा नहीं अपितु उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने वाले बनो, यही शिवत्व है