महिला एवं बाल विकास मंत्री ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में पोषण वाटिका का उद्घाटन किया

नई दिल्ली

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन इरानी ने महीने भर चलने वाले पोषण माह 2021 के तहत कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरुआत करते हुए कहा कि राष्ट्र की पोषण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए आयुर्वेद के उपयोग के प्राचीन ज्ञान का प्रभावी ढंग से प्रयोग कैसे किया जा सकता है, इस बारे में ज्ञान प्रदान करना समय की आवश्यकता है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने आज अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में पोषण माह – 2021 की शुरुआत के अवसर पर पोषण वाटिका का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयुष और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मुंजपारा महेंद्रभाई भी उपस्थित थे। दोनों मंत्रियों ने शिगरू (सहिजन) और आंवला के पौधों का पौधारोपण भी किया। आयुष मंत्रालय के निर्देशन में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली (एआईआईए) ने पोषण माह – 2021 के उत्सव की शुरुआत की।

 

कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री ने वैज्ञानिक आंकड़ों के प्रकाशन की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि दुनिया आयुर्वेद के योगदान को स्वीकार कर सके। पोषण के दो मुख्य घटक हैं, अर्थात् वहन करने योग्य और समग्र कल्याण के लिए आसानी से उपलब्धता। यहीं पर आयुर्वेद काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने डब्ल्यूसीडी मंत्रालय के माध्यम से स्वस्थ संतान और सरल तथा उत्कृष्ट व्यंजनों के लिए आयुष कैलेंडर को लोकप्रिय बनाने पर भी विचार किया।

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डॉ. मुंजपारा महेंद्रभाई ने कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों जैसे शिगरू, शतावरी, अश्वगंधा, आमला, तुलसी और हल्दी के पोषण तथा औषधीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मां और बच्चे की समग्र भलाई के लिए साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद पोषण प्रथाओं को बढ़ावा देने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वस्थ संतान को जन्म देने के लिए गर्भावस्था के दौरान मां के जीवन में पोषण के महत्व को भी रेखांकित किया और आयुर्वेद के उपयोग से कैसे मदद की जा सकती है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव इंदेवर पांडेय और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। महीने भर चलने वाले इस उत्सव के दौरान एआईआईए द्वारा रोगी जागरूकता व्याख्यान, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, अतिथि व्याख्यान और कार्यशालाओं जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

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इस अवसर पर शतावरी, अश्वगंधा, मूसली और यष्टिमधु जैसे पौधों का रोपण अभियान आयोजित किया गया तथा रोगियों और स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों के बीच स्वास्थ्य और पोषण का लाभ वाले इन पौधों का वितरण भी किया गया।आम जनता को पोषक मूल्य वाले चयनित पौधों की सूचना पुस्तिका भी प्रदान की गई। सत्तू पेय, तिल के लड्डू, झंगौर की खीर, नाइजर के बीज के लड्डू, आमलकी पनाका आदि जैसे विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले आयुर्वेदिक पौष्टिक व्यंजनों को भी कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया गया।