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पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – ज्येष्ठ
- अमांत – बैशाख
तिथि
- कृष्ण पक्ष अमावस्या – May 26 12:12 PM – May 27 08:32 AM
- शुक्ल पक्ष प्रतिपदा [ क्षय तिथि ] – May 27 08:32 AM – May 28 05:02 AM
- शुक्ल पक्ष द्वितीया – May 28 05:02 AM – May 29 01:54 AM
नक्षत्र
- रोहिणी – May 27 05:32 AM – May 28 02:50 AM
- म्रृगशीर्षा – May 28 02:50 AM – May 29 12:29 AM
करण
- नाग – May 26 10:21 PM – May 27 08:32 AM
- किस्तुघन – May 27 08:32 AM – May 27 06:45 PM
- बव – May 27 06:45 PM – May 28 05:02 AM
- बालव – May 28 05:02 AM – May 28 03:25 PM
योग
- सुकर्मा – May 27 02:54 AM – May 27 10:54 PM
- धृति – May 27 10:54 PM – May 28 07:08 PM
वार
- मंगलवार
त्यौहार और व्रत
- अमावस्या
- शनि जयंती
- रोहिणी व्रत
- भौमवती अमावस्या
आज (27 मई) ज्येष्ठ मास की अमावस्या है और शनि जयंती मनाई जा रही है। नौ ग्रहों में विशेष स्थान रखने वाले शनि देव को न्यायाधीश की उपाधि प्राप्त है। वे हमारे कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं। इस समय शनि देव मीन राशि में है। इस कारण कुंभ, मीन और मेष राशियों पर साढ़ेसाती चल रही है, जबकि सिंह और धनु राशियों पर ढय्या है।
शनि देव मकर और कुंभ राशियों के स्वामी हैं। इनके माता-पिता सूर्य और छाया हैं। शनि जयंती पर विशेष पूजन और व्रत करने से भक्तों को न सिर्फ शनि दोषों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में स्थिरता, प्रसन्नता, सफलता भी आती है।
ज्येष्ठ अमावस्या पर करें ये शुभ काम
सरसों के तेल से शनि देव का अभिषेक करें।
पूजा में काले तिल और उनसे बने व्यंजन अर्पित करें।
शनि देव को शमी के पत्ते, नीले (अपराजिता) फूल, नारियल, काले तिल और सरसों के तेल का दीपक अर्पण करें।
हनुमान जी की भी पूजा करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें, सीता-राम मंत्र का जप करें।
तेल, काले तिल, छाता, जूते-चप्पल, कपड़े, अनाज और धन का दान करें।
किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।
शनि देव के 10 नामों के मंत्र का जप करें- कोणस्थ पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोन्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मंदः पिप्पलादेन संस्तुतः ।। इस मंत्र में शनि देव के दस पावन नाम – कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद, और पिप्पलाद बताए गए हैं। शनि पूजा इन नामों का जप करना चाहिए।
जानिए शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाते हैं?
शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा के पीछे दो प्रमुख धार्मिक कथाएं हैं:
पहली मान्यता – जब रावण ने शनि देव को बंदी बना
लिया था, तब हनुमान जी ने लंका दहन के समय शनि को मुक्त कराया था। उस समय शनि देव के शरीर पर गहरे घाव थे, जिन्हें हनुमान जी ने सरसों का तेल लगाकर शांत किया। इसके मान्यता के आधार पर शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित हुई है।
दूसरी मान्यता – एक बार शनि को अपनी शक्ति पर अभिमान हो गया और उन्होंने हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा तो हनुमान जी ने उन्हें पराजित कर दिया। हनुमान जी के प्रहारों की वजह से शनिदेव को शारीरिक दर्द हो रहा था, उस समय हनुमान जी शनिदेव के शरीर पर तेल लगाया, जिससे शनिदेव का दर्द दूर हो गया। इस मान्यता की वजह से भी शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा बनी।