पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
मनुष्य के जीवन में सबकुछ जुड़ा हुआ है। इसलिए जीवन में जब कोई परिस्थिति आए तो खण्ड-खण्ड करके मत देखिएगा। जैसे हम अपने जीवन की यात्रा में मार्ग और मंजिल को बांट लेते हैं। अगर बारीकी से देखें तो मंजिल अंतिम छोर है और मार्ग उसका पहला छोर।
ऐसे ही, हमारे भीतर शरीर भी है और आत्मा भी है। लेकिन मन जब हावी होता है तो इन दोनों को बांट देता है। अगर मन को हटा दें तो शरीर और आत्मा का अंतर समाप्त हो जाए। मन के हटते ही आप समझ जाएंगे कि हम और परमात्मा एक ही हैं।
जीवन में सब कुछ जोड़ने के लिए कुछ प्रयोग हैं। उनमें से एक प्रयोग कर्णप्रिय संगीत सुनने का भी है। आत्मा तक जाने के लिए एक साधन तो योग है ही, पर यदि कोई अच्छा-सा गीत-भजन सुनें- जिसका संगीत बड़ा शांत, सहज-सरल हो- तो भी आप जुड़ जाएंगे। क्योंकि उस गीत की ध्वनि और कम्पन ब्रह्माण्ड की ध्वनि से आपको जोड़ देगा। और यही हमारे भीतर के चक्रों पर एक ऊर्जा का कम्पन होता है, जो हमको आत्मा का स्पर्श कराता है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | नवमी – 06:28 ए एम, मार्च 13 तक | नक्षत्र | मूल – 12:43 ए एम, मार्च 13 तक |
|---|---|---|---|
| दशमी | पूर्वाषाढा | ||
| योग | सिद्धि – 09:59 ए एम तक | करण | तैतिल – 05:27 पी एम तक |
| व्यतीपात | गर – 06:28 ए एम, मार्च 13 तक | ||
| वार | गुरुवार | वणिज | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2082 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 28 | फाल्गुन – अमान्त | |
| राजा | सूर्य – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | शनि – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | सूर्य – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | चन्द्र – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | बुध – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | सूर्य – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | मंगल – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | बुध – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शुक्र – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | शनि – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | धनु | नक्षत्र पद | मूल – 11:24 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | कुम्भ | मूल – 06:04 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद | मूल – 12:43 ए एम, मार्च 13 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | पूर्व भाद्रपद | पूर्वाषाढा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 53 मिनट्स 35 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 05 मिनट्स 18 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:42 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |