पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज सोमवार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे वरुथिनी एकादशी कहते हैं। एकादशी पर विष्णु जी के लिए व्रत-उपवास करने की परंपरा है। सोमवार के स्वामी शिव जी माने गए हैं। ज्योतिष सोमवार का कारक ग्रह चंद्र को माना जाता है। एकादशी और सोमवार का योग होने से इस दिन विष्णु जी के साथ ही शिव जी और चंद्रदेव की भी पूजा खासतौर पर करनी चाहिए।
वरुथिनि एकादशी व्रत घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से किया जाता है। भगवान विष्णु की भक्ति और एकादशी व्रत से भक्तों का जीवन बदल सकता है।
एकादशी पर ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु की पूजा
सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में सबसे पहले प्रथम पूज्य गणपति का पूजन करें।
गणपति पूजन के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। विष्णु पूजन और व्रत करने का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को जल, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। आप चाहें तो विष्णु जी के साथ महालक्ष्मी की प्रतिमा भी स्थापित कर सकते हैं।
पीले फूल, तुलसी दल और चंदन अर्पित करें। भोग में मिठाई, मौसमी फल चढ़ाएं। धूप और दीप जलाएं।
ध्यान रखें तुलसी के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
वरुथिनी एकादशी की कथा पढ़ें-सुनें। भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें।
शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें।
अगले दिन (द्वादशी) सुबह पूजा के बाद व्रत खोलें।
जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं और इसके बाद स्वयं भोजन करें।
एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम
शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं, काले तिल चढ़ाएं। ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं।
हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय हो, तो सुंदर कांड का पाठ भी कर सकते हैं। ऊँ रामदूताय नमः मंत्र का जप भी किया जा सकता है।
जिन लोगों की कुंडली में चंद्र ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें सोमवार और एकादशी के योग में चंद्रदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए। चंद्र की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं
किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें।
आज अनाज, फल, जूते-चप्पल, कपड़े, छाता, पानी, मटका दान करें।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:10 ए एम | सूर्यास्त | 06:56 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 04:04 ए एम, अप्रैल 14 | चन्द्रास्त | 02:46 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | एकादशी – 01:08 ए एम, अप्रैल 14 तक | नक्षत्र | धनिष्ठा – 04:03 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| द्वादशी | शतभिषा | ||
| योग | शुभ – 05:17 पी एम तक | करण | बव – 01:18 पी एम तक |
| शुक्ल | बालव – 01:08 ए एम, अप्रैल 14 तक | ||
| वार | सोमवार | कौलव | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 30 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कुम्भ | नक्षत्र पद | धनिष्ठा – 09:55 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मीन | धनिष्ठा – 04:03 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | रेवती | शतभिषा – 10:08 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | रेवती | शतभिषा – 04:10 ए एम, अप्रैल 14 तक | |
| शतभिषा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 46 मिनट्स 00 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 12 मिनट्स 56 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:33 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:40 ए एम से 05:25 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:02 ए एम से 06:10 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:07 पी एम से 12:58 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:32 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:55 पी एम से 07:17 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:56 पी एम से 08:03 पी एम |
| निशिता मुहूर्त | 12:10 ए एम, अप्रैल 14 से 12:55 ए एम, अप्रैल 14 |