पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
कर्ताभाव का त्याग करें
कर्ताभाव ही तो जीवन में दुःखों का कारण भी है। जब हमारे भीतर कर्ताभाव आ जाता है और हम ये समझने लगते हैं, कि ये कर्म मैंने किया तो निश्चित ही उस कर्मफल के प्रति हमारी सहज आसक्ति भी हो जाती है। अब इच्छानुसार फल की प्राप्ति ही हमारे द्वारा संपन्न किसी भी कर्म का उद्देश्य रह जाता है।
ऐसी स्थिति में जब फल हमारे मनोनुकूल प्राप्त नहीं होता है तो निश्चित ही हमारा जीवन दुःख, विषाद और तनाव से भी भर जाता है।इसके ठीक विपरीत जब हम अपने कर्तापन का अहंकार त्याग कर इस भाव से सदा श्रेष्ठ कर्मों में निरत रहेंगे कि करने-कराने वाले तो एक मात्र वह प्रभु हैं। अब परिणाम चाहे सकारात्मक आये अथवा नकारात्मक, हमारा मन विचलित नहीं होगा और एक अखंडत आनंद की अनुभूति हमें सतत होती रहेगी।
कर्ताभाव रहित कर्म करना ही तो गीता जी का कर्मयोग है। कर्मयोगी बनकर जीना कर्मभोगी बनने से भी बचा लेता है।
प्रभात चिंतन
एकं हन्यान्न वा हन्यादिषुर्मुक्तो धनुष्मता।बुद्धिर्बुद्धिमतोत्सृष्टा हन्याद् राष्ट्रम सराजकम्॥
भावार्थ:- कोई धनुर्धर जब बाण छोड़ता है तो हो सकता है कि वह बाण किसी को मार दे या ना भी मारे, लेकिन जब एक बुद्धिमान कोई गलत निर्णय लेता है तो उससे राजा सहित संपूर्ण राष्ट्र का विनाश हो
पञ्चाङ्ग
| तिथि | पूर्णिमा – 10:52 पी एम तक | नक्षत्र | स्वाती – 04:35 ए एम, मई 02 तक |
|---|---|---|---|
| प्रतिपदा | विशाखा | ||
| योग | सिद्धि – 09:13 पी एम तक | करण | विष्टि – 10:00 ए एम तक |
| व्यतीपात | बव – 10:52 पी एम तक | ||
| वार | शुक्रवार | बालव | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 18 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | तुला | नक्षत्र पद | स्वाती – 08:49 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मेष | स्वाती – 03:24 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | भरणी | स्वाती – 09:59 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | भरणी – 11:46 ए एम तक | स्वाती – 04:35 ए एम, मई 02 तक | |
| भरणी | विशाखा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 12 मिनट्स 59 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 46 मिनट्स 12 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:27 ए एम से 05:10 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:48 ए एम से 05:53 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:03 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:42 पी एम से 03:34 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:05 पी एम से 07:26 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:06 पी एम से 08:11 पी एम |
| अमृत काल | 06:56 पी एम से 08:41 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:07 ए एम, मई 02 से 12:51 ए एम, मई 02 |