आज का पंचांग : मधुर स्वभाव

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिंतन
मधुर स्वभाव

चेहरे की सुंदरता नहीं अपितु स्वभाव की मधुरता ही सम्बन्धों में स्थायी प्रीति का आधार है। मधुर स्वभाव ही जीवन को मधुरता और सुंदरता प्रदान करता है। यदि किसी व्यक्ति में सुंदरता की कमी हो तो अच्छे स्वभाव से पूरी की जा सकती है, लेकिन अच्छे स्वभाव की कमी हो तो सुंदरता से उसकी पूर्ति कभी नहीं की जा सकती। चेहरे की सुंदरता तो प्रकृति पर निर्भर होती है, लेकिन स्वभाव की सुंदरता हमारी प्रवृत्ति पर निर्भर करती है।

चेहरे की सुंदरता जहाँ केवल आँखों तक उतर पाती है, वहीं स्वभाव की सुंदरता सामने वाले के हृदय तक उतर जाती है। अच्छा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल में उतार देता है तो बुरा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल से भी उतार देता है। आज हम लोग इसलिए भी दुःखी रहते हैं क्योंकि हम मकान, शहर, देश, मित्र, सम्बंध सब कुछ बदलते हैं पर अपना स्वभाव नहीं बदल पाते। अपने स्वभाव को मृदु बनाओ ताकि हमारा पूरा जीवन मधुरता से भर सके।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:52 ए एमसूर्यास्त07:07 पी एम
चन्द्रोदय07:59 पी एमचन्द्रास्तचन्द्रास्त नहीं
पञ्चाङ्ग
तिथिप्रतिपदा – 12:49 ए एम, मई 03 तकनक्षत्रविशाखा – पूर्ण रात्रि तक
द्वितीयाकरणबालव – 11:49 ए एम तक
योगव्यतीपात – 09:45 पी एम तककौलव – 12:49 ए एम, मई 03 तक
वरीयान्तैतिल
वारशनिवार  
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते19वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशितुला – 12:30 ए एम, मई 03 तकनक्षत्र पदविशाखा – 11:12 ए एम तक
वृश्चिकविशाखा – 05:51 पी एम तक
सूर्य राशिमेषविशाखा – 12:30 ए एम, मई 03 तक
सूर्य नक्षत्रभरणीविशाखा
सूर्य नक्षत्र पदभरणी  
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 14 मिनट्स 22 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान10 घण्टे 44 मिनट्स 50 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:26 ए एम से 05:09 ए एमप्रातः सन्ध्या04:48 ए एम से 05:52 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:03 पी एम से 12:56 पी एमविजय मुहूर्त02:42 पी एम से 03:35 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:05 पी एम से 07:27 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:07 पी एम से 08:11 पी एम
अमृत काल09:25 पी एम से 11:11 पी एमनिशिता मुहूर्त12:07 ए एम, मई 03 से 12:50 ए एम, मई 03
त्रिपुष्कर योग12:49 ए एम, मई 03 से 05:51 ए एम, मई 03

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