पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.
आज प्रतिपदा तिथि 07:01 AM तक उपरांत द्वितीया तिथि 04:07 AM तक उपरांत तृतीया | नक्षत्र भरणी 03:39 PM तक उपरांत कृत्तिका | सिद्धि योग 10:52 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण कौलव 07:02 AM तक, बाद तैतिल 05:36 PM तक, बाद गर 04:07 AM तक, बाद वणिज. आज राहु काल का समय 02:59 PM – 04:23 PM है | आज 09:06 PM तक चन्द्रमा मेष उपरांत वृषभ राशि पर संचार करेगा.
अभय दान
प्रभु में विश्वास की कमी ही हमारे मन में भय को जन्म देती है। जीवन में व्याप्त समस्त भय का वास्तविक समाधान उस परम कृपालु गोविंद की शरण में ही संभव है। जब मन आशंकाओं से घिर जाए, बुद्धि भ्रमित हो जाए और परिस्थितियाँ हमारे साहस की परीक्षा लेने लगें, तब प्रभु के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देना चाहिए।
भय किसी वस्तु को खोने का हो, धन-संपत्ति लुटने का हो, शत्रु का हो, अपनों से बिछुड़ने का हो अथवा स्वयं प्राणों का ही क्यों न हो—प्रभु की शरण मनुष्य को भीतर से निर्भय होने का सामर्थ्य प्रदान करती है। आवश्यकता केवल इतनी है कि हम उस सत्य को हृदय से स्वीकार करें कि हमारा वास्तविक रक्षक कौन है।
मनुष्य कितना ही बलवान, सामर्थ्यवान और संपत्तिवान क्यों न हो, विपत्ति की घड़ी में उसकी सारी शक्ति सीमित हो जाती है। तब परमात्मा पर अटूट विश्वास ही मन को संबल देता है। संसार के सहारे परिस्थितियों के साथ बदल सकते हैं, किंतु प्रभु के प्रति सच्ची श्रद्धा हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और आशा से जोड़े रखती है।
रोग में, शोक में, दुःख में, पीड़ा में अथवा जीवन के किसी भी संकट में—जब हम निष्कपट भाव से प्रभु के शरणागत होते हैं, तब उनकी कृपा हमारे अंतर्मन को शक्ति प्रदान करती है। भय का अंधकार धीरे-धीरे विश्वास के प्रकाश में विलीन होने लगता है और मनुष्य विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की सामर्थ्य प्राप्त करता है।
अभय दान का वास्तविक अर्थ केवल भय से मुक्ति नहीं, बल्कि उस विश्वास की प्राप्ति है, जिसमें मनुष्य कठिनतम परिस्थितियों में भी भीतर से टूटता नहीं।
जब हृदय में गोविंद का वास हो, तो परिस्थितियाँ चाहे कितनी ही प्रतिकूल क्यों न हों, मन में आशा का दीप जलता रहता है। क्योंकि सच्ची शरणागति हमें यह अनुभूति कराती है कि हम अकेले नहीं हैं—हमारे साथ उस करुणासागर प्रभु की कृपा है।
इसलिए भय से मत घबराइए, प्रभु पर विश्वास कीजिए। जहाँ समर्पण है, वहाँ साहस है; जहाँ श्रद्धा है, वहाँ आशा है; और जहाँ गोविंद का स्मरण है, वहाँ मन को अभय प्राप्त करने का मार्ग अवश्य मिलता है।