आज का पंचांग : भीतर उतरे शांति

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.

आज अष्टमी तिथि 01:10 PM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र आश्लेषा 03:46 AM तक उपरांत मघा | शुभ योग 12:06 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग | करण कौलव 01:11 PM तक, बाद तैतिल 12:29 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 08:00 AM – 09:23 AM है | आज 03:46 AM तक चन्द्रमा कर्क उपरांत सिंह राशि पर संचार करेगा.

शक्ति का अहंकार नहीं, मन की शांति ही वास्तविक विजय है।

रामायण का एक प्रसंग हमें जीवन की बड़ी सीख देता है। जब हनुमान जी रावण की भरी सभा में खड़े थे, तब उन्होंने उसके बल और सामर्थ्य के बावजूद उसके अहंकार तथा गलतियों की ओर संकेत किया। इतिहास और जीवन का सत्य यही है कि बड़े-बड़े शक्तिशाली भी अपनी गलतियों, अहंकार और विवेकहीन निर्णयों के कारण पराजित होते हैं।

दुनिया में संघर्ष और युद्ध शायद कभी पूरी तरह समाप्त न हों। परिस्थितियाँ बदलती रहेंगी, विचार टकराते रहेंगे और अशांति के बादल भी मंडराते रहेंगे। लेकिन इन सबके बीच एक सामान्य मनुष्य अपने भीतर शांति का दीपक तो जला ही सकता है।

इसके लिए एक छोटा-सा प्रयोग कीजिए।

दिन में दो या तीन बार, कुछ क्षणों के लिए विचारों को विराम दें। आँखें बंद करें, मन को शांत करें और सहज रूप से गहरी साँस लें। कल्पना करें कि श्वास नाभि तक पहुँच रही है और वहीं से धीरे-धीरे बाहर निकल रही है। साँस पर ध्यान रखें, विचारों के पीछे न भागें।

बस कुछ क्षण स्वयं के साथ रहें।

याद रखिए, बाहरी दुनिया का युद्ध हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन अपने भीतर चल रहे युद्ध को शांत करना हमारे हाथ में है।

जब मन शांत होता है, तो निर्णयों में विवेक आता है, व्यवहार में करुणा आती है और जीवन में संतुलन उतरने लगता है।

दुनिया को बदलने से पहले अपने भीतर शांति उतारिए। क्योंकि शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ने की कला है।