पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
कार्तिक कृष्ण पक्ष सप्तमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन |आज है कालाष्टमी और अहोई अष्टमी.
आज सप्तमी तिथि 02:51 PM तक उपरांत अष्टमी | नक्षत्र पुष्य 04:30 AM तक उपरांत आश्लेषा | साध्य योग 02:39 PM तक, उसके बाद शुभ योग | करण बव 02:52 PM तक, बाद बालव 01:58 AM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 04:21 PM – 05:44 PM है | आज चन्द्रमा कर्क राशि पर संचार करेगा.
खुशहाली के तीन सूत्र
जीवन में खुश रहने के लिए हमेशा बड़े बदलावों की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी हमारा छोटा-सा दृष्टिकोण ही जीवन में बड़ी खुशियों का द्वार खोल देता है। यदि जीवन को प्रसन्नता से भरना है, तो तीन बातें अपने स्वभाव का हिस्सा बना लीजिए—थोड़ा धैर्य रखिए, थोड़ा सहन करना सीखिए और कुछ बातों को अनदेखा करना सीखिए।
पहला सूत्र है—धैर्य
हर परिस्थिति में पर्वत की तरह अडिग रहना सीखिए। जीवन में विपत्तियों के तूफान आएँगे, कठिनाइयाँ रास्ता रोकेंगी, लेकिन याद रखिए, तूफान हमेशा नहीं रहते। जो व्यक्ति धैर्यवान होता है, उसमें दुःखों को सहने और परिस्थितियों से संघर्ष करने की अद्भुत क्षमता होती है। जल्दबाजी और विचलित मन समस्याओं को बढ़ाते हैं, जबकि धैर्य समाधान का मार्ग दिखाता है।
दूसरा सूत्र है—सहनशीलता
अपने भीतर परिस्थितियों को स्वीकार करने और सहन करने की क्षमता विकसित कीजिए। हर बात का उत्तर देना, हर व्यवहार का प्रतिकार करना और हर परिस्थिति से लड़ना आवश्यक नहीं है। जिसने सहना सीख लिया, उसने जीवन में संतुलित और प्रसन्न रहना भी सीख लिया। सहनशीलता कमजोरी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति का परिचय है।
तीसरा सूत्र है—अनदेखा करना
व्यवहार के संसार में प्रतिदिन ऐसी अनेक बातें होती हैं, जिन्हें दिल से लगाने के बजाय अनदेखा कर देना ही बेहतर होता है। किसी की निंदा, अपमान, कटु वचन अथवा दूसरों की त्रुटियों को देखकर स्वयं को विचलित न करें। हर आलोचना का उत्तर देना और हर विवाद में उलझना जरूरी नहीं है। कभी-कभी मौन रहकर आगे बढ़ जाना ही सबसे बड़ी समझदारी होती है।
याद रखिए, जीवन की सारी ऊर्जा दूसरों को सुधारने, जवाब देने और स्वयं को सही सिद्ध करने में खर्च कर देंगे, तो अपने भीतर खुश रहने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं।
धैर्य हमें स्थिरता देता है, सहनशीलता हमें शक्ति देती है और अनदेखा करने की कला हमें मानसिक शांति देती है।
इसलिए जीवन को बोझ नहीं, उत्सव बनाइए। हर छोटी बात पर विचलित होने के बजाय अपने भीतर इतना विस्तार पैदा कीजिए कि परिस्थितियाँ आपको नहीं, बल्कि आप परिस्थितियों को नियंत्रित कर सकें।
क्योंकि खुशहाली बाहर की परिस्थितियों में नहीं, हमारे भीतर के दृष्टिकोण में बसती है।