आज का पंचांग : सुंदरता और कुरूपता : देह के पार

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

कार्तिक कृष्ण पक्ष पंचमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.

आज पंचमी तिथि 07:25 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र म्रृगशीर्षा 09:04 AM तक उपरांत आद्रा | शिव योग 08:41 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग | करण कौलव 08:46 AM तक, बाद तैतिल 07:25 PM तक, बाद गर 06:09 AM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 10:46 AM – 12:10 PM है | आज चन्द्रमा मिथुन राशि पर संचार करेगा.

सुंदरता और कुरूपता : देह के पार

सुंदरता और कुरूपता के मामले में हमारी दृष्टि प्रायः देह पर आकर ठहर जाती है। कौन सुंदर है और कौन कुरूप—मनुष्य के शरीर के संबंध में यह निर्णय हमारा अपना दिया हुआ प्रमाण-पत्र है। हम अपनी दृष्टि, अपनी पसंद और अपने संस्कारों के आधार पर किसी को सुंदर तो किसी को कुरूप घोषित कर देते हैं।

लेकिन क्या सुंदरता का कोई सार्वभौमिक मापदंड है?

जिसे हम एक स्थान पर सुंदरता मानते हैं, वही दूसरे स्थान पर कुरूपता बन जाती है। हमारी पसंद बदलती है, समाज की दृष्टि बदलती है और सुंदरता की परिभाषा भी बदल जाती है।

शायद इसीलिए देह पर टिकने वाली दृष्टि कभी सुंदरता के वास्तविक अर्थ तक पहुँच ही नहीं पाती। क्योंकि सुंदरता केवल चेहरे की बनावट, रंग या शरीर की आकृति में नहीं होती। वह दृष्टि में भी होती है, विचारों में भी, व्यवहार में भी और उस संवेदना में भी, जो किसी दूसरे के अस्तित्व को स्वीकार करना जानती है।

देह की सुंदरता आँखों को आकर्षित करती है, लेकिन मन की सुंदरता हृदय में स्थान बनाती है।