प्रकाश पर्व पर एक विचार : दीयों के साथ सूर्य के प्रकाश का भी सम्मान करें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन. आज है मास शिवरात्रि.

आज त्रयोदशी तिथि 10:48 AM तक उपरांत चतुर्दशी. नक्षत्र चित्रा 05:52 AM तक उपरांत स्वाति. प्रीति योग 03:27 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग. करण वणिज 10:48 AM तक, बाद विष्टि 11:05 PM तक, बाद शकुनि. आज राहु काल का समय 09:25 AM – 10:47 AM है. आज 05:15 PM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा.

प्रकाश पर्व पर एक विचार : दीयों के साथ सूर्य के प्रकाश का भी सम्मान करें

लेखक की कलम से

इस वर्ष प्रकाश पर्व दीपावली पर एक विचार अवश्य किया जाना चाहिए।

हम दीयों को पूजते हैं। दीये कभी शोर नहीं करते, न ही धुआँ फैलाते हैं। वे तो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि उसी दीये को प्रज्वलित करने वाले हम लोग दीपावली की रात प्रकृति को भरपूर शोर और धुआँ देते हैं। अब जरा ठहरकर सोचिए कि आखिर हम किस प्रकाश की पूजा कर रहे हैं?

दुनिया का सबसे सुंदर, सहज और प्राकृतिक प्रकाश वह है, जो प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्यदेव हमें प्रदान करते हैं। सूर्य का प्रकाश जीवन का आधार है। प्रकृति, वनस्पति, जीव-जंतु और समस्त संसार इसी प्रकाश से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

लेकिन हमारा व्यवहार देखिए। साल भर हम सूर्य के प्रकाश का न तो पर्याप्त सम्मान करते हैं और न ही उसके महत्व को अपने जीवन में उतारते हैं। अधिकांश लोग सूर्योदय के बाद जागते हैं। प्रकृति द्वारा प्रतिदिन निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही इस अनमोल पूंजी का हम सदुपयोग नहीं कर पाते, जबकि दीपावली की एक रात चार-पाँच दीये जलाकर प्रकाश की आराधना करने का भाव रखते हैं।

निश्चित रूप से दीये पूजे जाने चाहिए। वे त्याग, तपस्या, सकारात्मकता और दूसरों के लिए स्वयं जलने का संदेश देते हैं। लेकिन साथ ही सूर्य के प्रकाश का सम्मान करना और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही आवश्यक है।

इस दीपावली पर आइए, प्रकाश के साथ जीवन को बेहतर बनाने का एक और संकल्प लें।

इस बार ‘Growth’ और ‘Giving’ दोनों को साथ लेकर चलें।

खूब धन अर्जित करें, अपनी आय और समृद्धि बढ़ाएं, अपने परिवार का जीवन बेहतर बनाएं। लेकिन जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, उसमें से एक निश्चित हिस्सा उन लोगों के लिए भी निकालें, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

किसी जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा, किसी गरीब परिवार का उपचार, किसी असहाय व्यक्ति की सहायता या किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा का संचार—आपकी कमाई का एक छोटा-सा हिस्सा किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

याद रखिए, प्रकाश केवल वह नहीं है जो अंधकार को दूर करे, प्रकाश वह भी है जो किसी के जीवन में आशा, अवसर और आत्मसम्मान पैदा करे।

इस दीपावली एक दीया अपने घर में जलाएं, एक दीया प्रकृति के सम्मान में और एक दीया किसी जरूरतमंद के जीवन को रोशन करने के लिए जलाएं।

यही प्रकाश पर्व की सार्थकता है।