आज का पंचांग : सुख की सच्ची खान है भक्ति

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

कार्तिक कृष्ण पक्ष दशमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.

आज दशमी तिथि 11:03 AM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 03:30 AM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी | ब्रह्म योग 08:00 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग 06:26 AM तक, उसके बाद वैधृति योग | करण विष्टि 11:03 AM तक, बाद बव 10:47 PM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 12:10 PM – 01:33 PM है | आज चन्द्रमा सिंह राशि पर संचार करेगा.

सुख की सच्ची खान है भक्ति

मनुष्य का जीवन प्रायः दो भावों के बीच झूलता रहता है—मनचाहा और अनचाहा। सुख मनचाहा है और दुख अनचाहा। हर व्यक्ति सुख चाहता है, लेकिन अक्सर सुख के पीछे दुख भी चला आता है।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसका एक अद्भुत समाधान बताया है। यदि ऐसा सुख चाहिए, जिसके पीछे दुख न आए, तो उस सुख की खान का नाम है—भक्ति।

इसी भाव को काकभुशुंडि जी ने इन शब्दों में व्यक्त किया है—

“सब सुख खानि भगति तैं मागी। नहिं जग कोउ तोहि सम बड़भागी॥”

अर्थात् जब मैंने प्रभु श्रीराम से भक्ति मांगी, तो उन्होंने कहा कि तुमने समस्त सुखों की खान भक्ति मांग ली है। संसार में तुम्हारे समान भाग्यशाली कोई दूसरा नहीं है।

वास्तव में भाग्यशाली वही है, जिसके जीवन में भक्ति का आगमन हो जाए। लेकिन विडंबना यह है कि कुछ लोग भक्ति प्राप्त करने के बाद भी उसका सदुपयोग नहीं कर पाते, बल्कि उसका दुरुपयोग करने लगते हैं।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण रावण है।

रावण भगवान शिव का परम भक्त था। उसने कठोर तपस्या से शिवजी को प्रसन्न किया और उनकी कृपा भी प्राप्त की। लेकिन भक्ति से प्राप्त शक्ति को उसने अहंकार, अत्याचार और अपने स्वार्थ का साधन बना लिया।

यही इस प्रसंग की सबसे बड़ी सीख है—भक्ति केवल भगवान को पाने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं को बदलने का मार्ग भी है। भक्ति यदि जीवन में विनम्रता, विवेक, करुणा और सदाचार नहीं लाती, तो उसका वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

सच्ची भक्ति वह है, जो मनुष्य को शक्ति के साथ मर्यादा, सामर्थ्य के साथ सेवा और ज्ञान के साथ विनम्रता भी सिखाए।