ज्योतिर्मठ में शङ्कराचार्य महाराज का भव्य स्वागत हुआ
ज्योतिर्मठ, चमोली
उत्तराखण्ड के मानचित्र का प्रमुख धार्मिक केन्द्र समस्त उत्तर विश्व की धार्मिक राजधानी ज्योतिर्मठ को कालक्रम से लोग जोशीमठ नाम से जानने लग गए थे। ऐसे में ब्रह्मलीन पूज्यपाद द्विपीठाधीश्वर की प्रेरणा से ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘१००८’ ने सहित अनेकों की पहल पर प्रदेश के मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी जी ने इस नगर को पुनः उसका प्राचीन नाम ‘ज्योतिर्मठ’ किया।
अब ये पूरा नगर ज्योतिर्मठ हो चुका एतदर्थ हम सब नगरवासी एक परिवार के सदस्य हो गए, इस उदात्त भावना को जीवन्त करने के लिए एक साथ अपना परम्परागत पकवान ‘रोट-अरसा’ का निर्माण स्थानीय मातृशक्ति द्वारा किया गया है ।
दो दिन बाद जब आदि शङ्कराचार्य महाराज की डोली ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर-मस्जिद पहुंचेगी उसी समय ये प्रसाद समस्त नगरवासियों को वितरित किया जाएगा। ज्योतिर्मठ में निवास कर रहे प्रत्येक व्यक्ति तक ये प्रसाद पहुँचेगा ।
आज बदरीनाथ जी के कपाट मंगलम् के बाद ज्योतिर्मठ पधारने पर पूज्यपाद शङ्कराचार्य महाराज का भव्य स्वागत अभिनन्दन हुआ। पूरे ज्योतिर्मठ के 35 से अधिक महिला मङ्गल समूहों की उपस्थित मातृशक्ति को पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
शङ्कराचार्य महाराज ने कहा कि प्रति वर्ष एक दिन ऐसा होना चाहिए कि हम सब हर तरह के भेद-भाव को छोड़कर एक परिवार बनें ।
पूज्य शङ्कराचार्य जी महाराज ने कहा कि ज्योतिर्मठ के संन्यासी और ब्रह्मचारी ज्योतिर्मठ के प्रत्येक घर में जाकर ये प्रसाद समर्पित करेंगे ।
आज के कार्यक्रम में उपस्थित रहे स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि, सहजानन्द ब्रह्मचारी, विष्णुप्रियानन्द ब्रह्मचारी, अजय पाण्डेय, आनन्द सती, कुशलानन्द बहुगुणा, शिवानन्द उनियाल, अनिल डिमरी, समीर डिमरी, महिमानन्द उनियाल, जगदीश उनियाल, सन्तोष सती, अभिषेक बहुगुणा, दिवाकर भट्ट, प्रवीण नौटियाल, शिवम पाण्डेय आदि उपस्थित रहे ।