आज का पंचांग : जानिए अंगूठे के आकार वाले 60,000 दिव्य ऋषियों की रहस्य कथा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

Uttarakhand
Oplus_16908288

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

पुराणों में एक से एक तेजस्वी ऋषियों का उल्लेख मिलता है लेकिन बालखिल्य ऋषियों का उल्लेख चौंकाने वाला है। इनकी खासियत ये थी कि ये मात्र अंगूठे जितने बड़े थे। बालखिल्य का अर्थ होता है — छोटे लेकिन शक्तिशाली उपऋषियों का समूह। बालखिल्य ऋषियों का उल्लेख ऋग्वेद, महाभारत, वायु पुराण, ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है। बालखिल्य ऋषि, ऋषि कश्यप के सहायक माने जाते हैं। ये लगातार सूर्यदेव की पूजा करते रहते हैं और सूर्य के चारों ओर ही मंडल बनाए हुए, ध्यानस्थ रहते हैं। शास्त्रों और वेदों में बालखिल्य ऋषियों की संख्या 60,000 बताई जाती है। इनका शरीर भले ही अंगूठे के बराबर था परंतु इनमें अद्भुत दिव्य शक्ति थी। ये सभी तपस्या, मंत्रोच्चारण और ध्यान में लीन रहते थे। सूर्यदेव की परिक्रमा करते हुए ये उसकी पूजा करते थे। एक मान्यता के अनुसार, ये ब्रह्मा जी के “तप:तेज” से उत्पन्न हुए थे। कुछ शास्त्रों में इन्हें ऋषि कश्यप के मानसिक पुत्रों के रूप में भी माना गया है।

बालखिल्य ऋषियों द्वारा पक्षी गरुड़ की उत्पत्ति एक कथा के अनुसार, एक बार ये ऋषि अपने पिता कश्यप के यज्ञ हेतु एक पेड़ की टहनी उठाकर ले जा रहे थे। चूंकि इन सब ऋषियों का आकार बहुत छोटा था, इसलिए उनकी संख्या साठ हजार होने के बावजूद उन्हें उस छोटी सी टहनी को ले जाने में भी उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी। तभी वहाँ से देवताओं के राजा इंद्र अपने शानदार रथ पर सवार होकर गुजरे। इंद्र ने जब उन छोटे-छोटे ऋषियों को पेड़ की टहनियों के बोझ से जूझते देखा, तो उनका मजाक उड़ाते हुए कहा कि ये छोटी सी टहनी लेकर वे कहाँ जा रहे हैं। उन ऋषियों ने इंद्र के मजाक की अनदेखी की और बस इतना कहा कि वे अपने पिता के यज्ञ के लिए ये लकड़ी लेकर जा रहे हैं। इंद्र ये सुनकर हंस पड़ा और उसने उनलोगों का उपहास करते हुए कहा कि इस छोटी सी टहनी से यज्ञ में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इंद्र के उपहास से ऋषि आहत हो गए और उन्होंने इंद्र को श्राप देते हुए कहा कि ‘तुम्हें अपने आपपर बहुत घमंड है ना। तुम्हारे इस घमंड को तोड़ने के लिए हम एक नए इंद्र की उत्पत्ति करेंगे, जो तुमसे भी अधिक शक्तिशाली होगा। ऋषियों के पिता ऋषि कश्यप को जब इस श्राप के बारे में पता चला, तो उन्होंने बालखिल्य ऋषियों को समझाया कि देवताओं के राजा इंद्र केवल एक ही हो सकते हैं। श्राप तो अब वापस लिया नहीं जा सकता था, इसलिए ऋषियों ने उसमें संशोधन करते हुए कहा कि जो नया इंद्र होगा वो पक्षियों का इंद्र होगा। बाद में, ऋषि कश्यप की पत्नी विनता ने गरुड़ को जन्म दिया जो भगवान विष्णु का वाहन बना तथा ‘पक्षियों का इंद्र’ कहलाया।

Uttarakhand Uttarakhand

श्रावण शुक्ल पक्ष दशमी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण |

आज दशमी तिथि 11:42 AM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र अनुराधा 09:12 AM तक उपरांत ज्येष्ठा | ब्रह्म योग 07:04 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग | करण गर 11:42 AM तक, बाद वणिज 12:31 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 07:40 AM – 09:17 AM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – श्रावण
  4. अमांत – श्रावण

तिथि

Uttarakhand UttarakhandUttarakhand
  1. शुक्ल पक्ष दशमी   – Aug 03 09:42 AM – Aug 04 11:42 AM
  2. शुक्ल पक्ष एकादशी   – Aug 04 11:42 AM – Aug 05 01:12 PM

नक्षत्र

  1. अनुराधा – Aug 03 06:35 AM – Aug 04 09:12 AM
  2. ज्येष्ठा – Aug 04 09:12 AM – Aug 05 11:22 AM