पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्माण्डा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्माण्डा अपनी दिव्य ऊर्जा से समस्त सृष्टि को प्रकाशमान करने वाली देवी हैं। उनकी आराधना से भक्तों को सुख, समृद्धि, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि मां कूष्माण्डा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से रोग-दोष और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन भक्त माता को प्रिय भोग अर्पित करते हैं और उनके मंत्रों का जाप कर सुख-शांति एवं खुशहाली की कामना करते हैं।
धार्मिक परंपराओं में मां कूष्माण्डा की पूजा के लिए गहरे नीले रंग को शुभ बताया गया है। भक्त इस रंग के वस्त्र धारण कर माता की आराधना करते हैं। नवरात्र के इस पावन अवसर पर मां कूष्माण्डा से परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
चतुर्थ नवरात्रि की मंगल बधाई
दुनिया में केवल शक्ति सम्पन्न होने मात्र से ही कोई भी वन्दनीय नहीं बन जाता है अपितु उस शक्ति का सही व समय पर प्रयोग करने वालों को ही युगों – युगों तक स्मरण रखा जाता है। केवल सामर्थ्यवान होना पर्याप्त नहीं है अपितु उस सामर्थ्य को लोक मंगल एवं लोक कल्याण में लगाना ही जीवन की परम श्रेष्ठता एवं सार्थकता है।
अथाह शक्ति सम्पन्न होने पर भी माँ दुर्गा ने अपनी सामर्थ्य का प्रयोग कभी भी किसी निर्दोष को दण्डित करने हेतु नहीं किया अपितु केवल और केवल आसुरी वृत्तियों के नाश के लिए ही किया। शक्ति का गलत दिशा में प्रयोग ही तो पाप है।
साधन शक्ति सम्पन्न हो जाने पर कायर बनकर चुप बैठ जाना यह भी एक प्रकार से असुरत्व को बढ़ाने जैसा ही है। अपनी समस्त शक्ति व साधनों को मानवता की रक्षा में लगाने की प्रेरणा हमें माँ जग जननी भगवती से लेनी होगी तभी हम माँ के पुत्र कहलाने योग्य होंगे। नवरात्रि के चतुर्थ दिवस में माँ के “कूष्मांडा” स्वरुप का पूजन व वंदन किया जाता है।