पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का चिंतन
लोगों में बराबरी करने की होड क्यों लगी है? आगे भी निकल जाने की सोच क्यों नहीं रखते। इन्सान का सरल स्वभाव ही इन्सानी जिन्दगी को आत्म संतुष्ट सरल और सफल बनाता है, यही जीवन का असली मूल मंत्र है। कोई आदमी गुज़र जाता है तो, गुण याद होते हैं, कर्म याद होते हैं, स्वभाव याद होता है, सुन्दरता नहीं।
आज का भगवद् चिन्तन
माँ कालरात्रि नमोऽस्तुते
हमारी सरलता, सजहता और विनम्रता ही जब धर्म रक्षा में अवरोधक बनने लगे तब धर्म रक्षा हेतु अपनी शक्ति का परिचय देना ही माँ के कालरात्रि स्वरूप की सीख है। नवरात्रि का सप्तम दिवस माँ काली को समर्पित होता है इसलिए ही इस दिन को कालरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। जीवन की अज्ञान और तमस भरी काल रात्रि में माँ की ज्ञान रुपी पावन ज्योति सत्मार्ग की ओर प्रेरित करती है।
समाज, राष्ट्र, धर्म और संस्कृति पर जब घोर अत्याचार होने लगा व राजसत्ता असहाय हो गई तब अम्बे-जगदम्बे से माँ को काली बनना पड़ा। जब आसुरी शक्तियाँ हावी हो गई तब माँ ने परिस्थिति अनुरूप स्वयं शस्त्र धारण कर आसुरी शक्तियों का न केवल नाश किया अपितु नारी के भीतर छिपी हुई शक्तियों से समाज को परिचित भी कराया।
अन्याय, अत्याचार, सामाजिक कुरीतियों व विषमताओं से लड़ने में नारी शक्ति के जागरण की बहुत बड़ी आवश्यकता है। अभिमन्यु तभी मरता है, जब कोई सुभद्रा सो जाती है। एक नवीन भारत के निर्माण में नारी शक्ति की बड़ी भूमिका है। समष्टि के मंगल हेतु ममतामय रूप से काली बने माँ के स्वरूप को कोटि-कोटि प्रणाम।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:31 ए एम | सूर्यास्त | 06:46 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 11:08 ए एम | चन्द्रास्त | 01:44 ए एम, मार्च 26 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | सप्तमी – 01:50 पी एम तक | नक्षत्र | मृगशिरा – 05:33 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| अष्टमी | आर्द्रा | ||
| योग | सौभाग्य – 03:09 ए एम, मार्च 26 तक | करण | वणिज – 01:50 पी एम तक |
| शोभन | विष्टि – 12:47 ए एम, मार्च 26 तक | ||
| वार | बुधवार | बव | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 11 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मिथुन | नक्षत्र पद | मृगशिरा – 11:54 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मीन | मृगशिरा – 05:33 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद | आर्द्रा – 11:13 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद | आर्द्रा – 04:54 ए एम, मार्च 26 तक | |
| आर्द्रा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 15 मिनट्स 08 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 43 मिनट्स 43 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:38 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:57 ए एम से 05:44 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:20 ए एम से 06:31 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:30 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:45 पी एम से 07:08 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:46 पी एम से 07:56 पी एम |
| अमृत काल | 09:19 ए एम से 10:49 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:14 ए एम, मार्च 26 से 01:01 ए एम, मार्च 26 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 06:31 ए एम से 05:33 पी एम |