आज का पंचांग : अपनी भूल स्वीकार करें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आश्विन कृष्ण पक्ष पंचमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, भाद्रपद. आज है रोहिणी व्रत.

आज पंचमी तिथि 12:35 PM तक उपरांत षष्ठी. नक्षत्र रोहिणी 04:27 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा. सिद्धि योग 09:17 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग. करण तैतिल 12:35 PM तक, बाद गर 11:25 PM तक, बाद वणिज. आज राहु काल का समय 01:45 PM – 03:13 PM है. आज चन्द्रमा वृषभ राशि पर संचार करेगा.

अपनी भूल स्वीकार करें

कभी-कभी जीवन में सबसे कठिन शब्द “मुझसे गलती हुई है” कहना होता है।
क्योंकि इन शब्दों को कहने के लिए केवल जुबान की नहीं, बल्कि अहंकार को झुकाने वाले साहस और अंतःकरण की सच्चाई की आवश्यकता होती है।

मनुष्य अपनी भूल से उतना नहीं टूटता, जितना उसे छिपाने के प्रयास में भीतर से बिखरता चला जाता है।
एक छोटी-सी गलती को छिपाने के लिए बोला गया एक झूठ, मन के भीतर ऐसी गाँठ बाँध देता है, जिसे खोलने के लिए फिर कई झूठों का सहारा लेना पड़ता है।

लेकिन जिस क्षण मनुष्य अपने सिर को झुकाकर अपनी भूल स्वीकार कर लेता है, उसी क्षण उसके भीतर सुधार की पहली किरण जन्म लेती है।

गलती हो जाना मनुष्य होने की निशानी है,
लेकिन गलती स्वीकार कर लेना अपने मन के प्रति ईमानदार होने की निशानी है।

यदि अनायास कोई भूल हो गई है, तो उसे स्वीकार कर लेना प्रायश्चित की पहली सीढ़ी है। सामने वाला आपकी भूल को क्षमा करे या न करे, लेकिन आपका सत्य के सामने खड़ा हो जाना आपके भीतर सुधार का द्वार खोल देता है।

परंतु भूल को छिपाने के लिए झूठ बोलना, फिर उस झूठ को बचाने के लिए दूसरा झूठ बोलना—यह केवल दूसरों को धोखा देना नहीं है; यह अपने ही विवेक को धीरे-धीरे कमजोर करना है।

अपनी भूल को छिपाना ऐसा है जैसे किसी घाव को कपड़े से ढक दिया जाए। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन भीतर घाव अपना काम करता रहता है। समय के साथ वही छोटी-सी उपेक्षित भूल बड़ी समस्या का रूप ले सकती है।

इसलिए जब कभी जीवन आपको आपकी भूल का आईना दिखाए, तो उससे आँखें मत चुराइए।

ठहरिए…
स्वयं को देखिए…
और साहस के साथ कहिए—

“हाँ, मुझसे भूल हुई है।”

यही स्वीकारोक्ति आपके भीतर परिवर्तन का जन्म देती है।
यही सत्य आपको अहंकार से मुक्त करता है।
और यही विनम्रता आपको दूसरों के हृदय के निकट ले जाती है।

याद रखिए—

भूल करना मनुष्य की कमजोरी हो सकती है,
लेकिन भूल स्वीकार करना उसकी शक्ति है।

सत्य का हाथ थामकर चलिए।
हो सकता है कुछ लोग आपके अतीत की भूलों को याद रखें,
लेकिन आपका वर्तमान सत्य और आपका भविष्य का आचरण ही अंततः आपकी पहचान बनेगा।

अपनी भूल से मत भागिए—
उसे स्वीकारिए, उससे सीखिए और स्वयं को पहले से बेहतर बनाइए।

क्योंकि जीवन में सबसे बड़ी विजय दूसरों को सही सिद्ध करना नहीं,
अपने भीतर के अहंकार पर विजय प्राप्त करना है।